नई दिल्ली, समदिया
आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज मे ‘लक्ष्मी-हरि स्मृति उपन्यास सम्मान अर्पण समारोह 2026’क आयोजन 28 सितंबर कें भव्यतापूर्वक संपन्न भेल। एहि अवसर पर मैथिलीक सुप्रसिद्ध उपन्यासकार सच्चिदानंद ‘सच्चू’ कें हुनकर तेसर उपन्यास ‘जाल’ लेल सम्मानित कएल गेल। उल्लेखनीय अछि जे सच्चू कें एहि सं पूर्व हुनकर चर्चित कृति ‘लालटेनगंज’ लेल सेहो एहि सम्मान सं सम्मानित कएल गेल छल।
ई सम्मान अप्रकाशित पांडुलिपिक आधार पर त्रिसदस्यीय निर्णायक मंडलक अनुशंसापर प्रदान कएल जाइत अछि। समारोह मे पुरस्कृत उपन्यास ‘जाल’क अतिरिक्त अंतिका प्रकाशन द्वारा तमिल आ हिंदी सं मैथिली मे अनूदित चारिटा पुस्तकक सेहो लोकार्पण कएल गेल।
मैथिली भाषा आ उपन्यास लेखन कें समर्पित लक्ष्मी-हरि स्मृति न्यास आ अंतिका प्रकाशनक संयुक्त तत्वावधान मे आयोजित ई सम्मान समारोह मैथिली साहित्यक विकासक लेल एकटा महत्वपूर्ण पहल मानल गेल। एहि सम्मानक आरंभ प्रसिद्ध मैथिली कथाकार आ आलोचक डॉ. श्रीधरम एवं डॉ. प्रोमिला द्वारा अपन माता-पिता महालक्ष्मी आ हरिदास जीक स्मृति मे वर्ष 2021 मे कएल गेल छल। एकर उद्देश्य मैथिली मे उपन्यास लेखन कें प्रोत्साहित करब अछि।
जेएनयू’क प्रोफेसर मणींद्र नाथ ठाकुरक अध्यक्षता मे समारोह संपन्न भेल। साहित्यक एहि आयोजन मे राजधानी दिल्ली आ लगपासक क्षेत्र सं पैघ संख्या मे साहित्यकार, समीक्षक, शोधार्थी आ मैथिली भाषा-साहित्यक अनुरागी उपस्थित भेलाह।

कार्यक्रमक आरंभ अंतिका प्रकाशनक संपादक आ मैथिली-हिंदीक प्रसिद्ध कथाकार-उपन्यासकार गौरीनाथक स्वागत वक्तव्य सं भेल। एहि अवसर पर प्रोफेसर ज्ञानतोष कुमार झा आ विपिन कुमार शर्मा हरिदास लिखित ‘जनम जुआ मति हारहु’ पर अपन विचार रखलनि। प्रोफेसर ज्ञानतोष कुमार झा आयोजनक सार्थकता पर प्रकाश दैत कहलनि जे भाषा-साहित्यक विकास लेल एहि प्रकारक आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण अछि। ओ सम्मानक प्रयोजनपुरुष हरिदासक आत्मकथा ‘जनम जुआ मति हारहु’क चर्चा करैत कहलनि जे एहि कृति मे अनुभवक प्रामाणिकताक संग समाजक मार्मिक स्थिति, व्यक्तिगत संघर्ष, मठ-महंती आ सामंती तत्वक विरुद्ध विद्रोह तथा मिथिलाक लोकजीवन आ ओकर अंतर्कलहक गहन चित्रण भेल अछि।
तदुपरांत प्रोफेसर कमलानंद झा, प्रोफेसर देवशंकर नवीन आ डॉ. तारानंद वियोगी सच्चिदानंद ‘सच्चू’क उपन्यास लेखन, साहित्यिक अवदान आ पुरस्कृत उपन्यास ‘जाल’क विषयवस्तु, सामाजिक सरोकार आ शिल्पगत विशेषतापर विस्तार सं अपन विचार रखलनि।
प्रोफेसर कमलानंद झा कहलनि जे सच्चिदानंद सच्चू कें उपन्यासक शिल्पक गहन बोध अछि आ हुनकर कथायुक्ति अद्भुत अछि। प्रोफेसर देवशंकर नवीन कहलनि जे ‘जाल’ पढ़ैत हुनका बेर-बेर बाबा नागार्जुनक कालिदास पर लिखल कविता स्मरण होइत रहल। हुनकर अनुसार उपन्यास मे ‘जाल’ आ ‘महाजाल’क बीच फंसल भारतीय समाजक जटिलता, संकीर्णता आ दुश्चक्रक सूक्ष्म चित्रण कएल गेल अछि। डॉ. तारानंद वियोगी सच्चिदानंद सच्चू कें ‘महाबली उपन्यासकार’ कहैत कहलनि जे हुनकर रचना पाठक कें अपना सं जबरदस्त ढंग सं जोड़ि रखने अछि। हुनकर अनुसार मैथिली कें दीर्घ समयक बाद एहि प्रकारक लेखक भेटल छथि।
अध्यक्षीय संबोधन मे प्रोफेसर मणींद्र नाथ ठाकुर समकालीन साहित्यिक परिदृश्य मे उपन्यास विधाक भूमिका आ समाज पर ओकर गहिंर प्रभावक चर्चा कएलनि।
सम्मानित रचनाकार सच्चिदानंद ‘सच्चू’ अपन रचनात्मक यात्राक संग उपन्यास ‘जाल’क लेखनक पृष्ठभूमि आ प्रेरणास्रोतक चर्चा करैत आयोजक आ पाठकक प्रति आभार व्यक्त कएलनि।
कार्यक्रमक समापन डॉ. श्रीधरमक धन्यवाद ज्ञापन सं भेल। संचालन शुभेंदु शेखर कएलनि। एहि अवसर पर अंतिका प्रकाशन द्वारा लगाओल गेल पुस्तक प्रदर्शनी सेहो मैथिली आ हिंदीक पाठकक विशेष ध्यान आकृष्ट कएलक।