सीतामढ़ी, समदिया
जनकपुरधाम सं दक्षिण दिशा मे अवस्थित पावन पुनौराधाम, जतय माता सीताक जन्म भेल छल, ओतय आब भव्य जानकी मंदिरक शिलान्यास 8 अगस्त कें होमय जा रहल अछि। एहि ऐतिहासिक आ आध्यात्मिक अवसर पर मिथिलाक जनमानस मे अपार हर्षक वातावरण अछि। एहि दिव्य आयोजनक संगहि मिथिलावासीक वर्षो पुरान मांग – माता सीताक जन्मस्थली पर भव्य मंदिर निर्माण – आब साकार रूप लए रहल अछि।
मिथिलाक लोक सदियो सं एहि भूमि कें श्रद्धा, आस्था आ गौरवक केन्द्र मानैत रहल अछि। पुनौराधाम कें जानकी जन्मभूमि मानल जाइत अछि, मुदा सरकारी स्तर पर एहि ठाम पर्याप्त विकास नहि भए पाओल छल। यद्यपि विभिन्न धार्मिक संगठन, स्थानीय नागरिक आ सांस्कृतिक मंच सभ द्वारा निरंतर मांग उठाओल जाइत रहल अछि, मुदा आब जा कए राज्य सरकार आ केंद्र सरकारक संयुक्त प्रयास सं ई मांग साकार होमय जा रहल अछि।
एहि शुभ अवसर पर भारत सरकारक गृहमंत्री अमित शाह स्वयं उपस्थित रहताह। बिहारक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आ अन्य गणमान्य व्यक्तित्वक उपस्थिति सेहो सुनिश्चित अछि। मंदिरक शिलान्यास संगहि संपूर्ण मिथिला मे एक नव धार्मिक चेतना जागृत होयत, एहन विश्वास व्यक्त कएल जा रहल अछि।
भव्य आ पारंपरिक होयत मंदिर
जानकी जन्मस्थली पर बनयवला ई मंदिर स्थापत्यक दृष्टिकोण सं अत्यंत भव्य आ पारंपरिक होयत। शिल्पशैली पूर्णरूपेण मिथिला आ नागर शैलीक समन्वय मे तैयार कएल जायत। मंदिरक मुख्य गर्भगृह मे माता सीताक बाल्यरूप प्रतिमा स्थापित होयत, संगहि राजा जनक, माता सुनयना आ श्रीरामक स्वरूप सेहो मंदिरक परिसर मे स्थापति होयत।
मंदिरक निर्माणमे स्थानीय लोककलाक उपयोग कएल जायत – विशेषतः मिथिला चित्रकला, कोहबर भित्तिचित्र आ शंख-माला डिजाइन। समग्र परिसर मे पुष्करिणी (पवित्र जलाशय), यज्ञशाला, धर्मशाला, आ यात्राक लेल विश्राम भवन सेहो बनाओल जायत। परिसरक सज्जा एहि तरहें होयत जे पर्यटक आ श्रद्धालु एक संग धार्मिक आ सांस्कृतिक अनुभूति प्राप्त कए सकथि।
36 मास मे पूर्ण होमक अछि
परियोजना प्रबंधकक अनुसार जानकी मंदिरक निर्माण कार्य लगभग 36 मास अर्थात् तीन वर्ष मे पूर्ण करबाक लक्ष्य राखल गेल अछि। मंदिरक निर्माण आदिक लेल राज्य सरकार हालहि मे 882 करोड़ टाकाक स्वीकृति देलक अछि। मंदिरक निर्माण मे मिथिलाक संस्कृतिक विशेष रूप सं ध्यान राखल जा रहल अछि।
सांस्कृतिक चेतनाक नव प्रवाह उत्पन्न होयत
एहि मंदिर निर्माण सं ने केवल धार्मिक पर्यटन कें गति भेटत, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प, रोजगार आ सांस्कृतिक चेतनाक नव प्रवाह उत्पन्न होयत। मिथिला मे सीता जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण एकटा सांस्कृतिक पुनरुत्थानक प्रतीक मानल जा रहल अछि। स्थानीय जनसमूहक अनुसार ई मांग हम सभ पीढ़ी दर पीढ़ी करैत रहलहुं अछि। आब जा कए ओ दिन आयल जहन माता सीताक नाम पर ओहि ठाम भव्य मंदिर बनत, जतय ओ जन्म लेने छलीह।
सर्वसाधारण आ श्रद्धालुक आग्रह अछि जे एहि स्थल कें भव्यता देल जाए संगहि मूल सांस्कृतिक स्वरूप सुरक्षित राखल जाए। मिथिला अब नव युग मे प्रवेश कए रहल अछि – जतय अपन गौरवशाली इतिहास, संस्कृति आ धर्म कें नव रूप मे विश्व पटल पर प्रस्तुत करबाक अवसर भेटत। एहि शिलान्यास संग मिथिलावासी एकटा नव प्रहर केर आरंभक साक्षी बनताह।
11 पवित्र नदीक जल सं होयत पूजन
शिलान्यास पूजन हेतु गंगा, यमुना, सरस्वती, कमला सहित 11 पवित्र नदीक जल संग्रह कएल गेल अछि। जलयात्रा स्वामी दिलीप योगीराजक नेतृत्व मे निकालल गेल छल। शिलान्यास कार्यक्रम 6 अगस्त सं शुरू भए गेल अछि। मुख्य कार्यक्रम आठ अगस्त कें होयत। आठ अगस्तक संध्या पुनौधाराम मे भजन-कीर्तनक अयोजन कएल जायत। पुनौराधाम मे आठ अगस्त कें 51 हजार दीप जराओल जायत। एकर संगहि सीतामढ़ी जिला सहित संपूर्ण मिथिला मे घर-घर दीप जरेबाक बात कहल जा रहल अछि।
151 फुट ऊंच होयत नव मंदिर
राममंदिर अयोध्याक तर्ज पर जानकी जन्मस्थान पर 151 फुट ऊंच भव्य मंदिर निर्माणक रूपरेखा तय भए चुकल अछि। ई मंदिर भारतीय शिल्पकला आ धार्मिक वास्तुकलाक उत्तम संगम होयत। प्राचीन मंदिरक जीर्णोद्धार लेल 137 करोड़ टाका आवंटित कयल गेल अछि, जखनकि शेष राशि तीर्थ पथ, सुविधा सभ आ आसपासक सौंदर्यीकरण पर खर्च होयत।
अही पाथर सं बनल छल रामललाक मंदिर
सीतामढ़ीक पुनौराधाम मे बनि रहल मां जानकी मंदिर पूर्ण रूपें वंशी पहाड़पुरक लाल बलुआ पाथर सं निर्मित होयत। बिहार सरकारक सहयोग सं बनि रहल एहि मंदिरक निर्माण मे संलग्न अभियंताक कहब अछि जे दीर्घकालिक मजबूती, समानता आ सौंदर्य कें ध्यान मे राखि ई पाथर चुनल गेल अछि। उद्देश्य ई अछि जे मंदिरक प्रत्येक दीवार एक समान आ कलात्मक हो, जाहि सं श्रद्धा आ विश्वासक भाव जागृत होए।
वास्तव मे, ई पाथर केवल निर्माण सामग्री नहि, बल्कि भारतक सांस्कृतिक आ शिल्प परंपराक प्रतीक थिक। एकर माध्यम सं एकटा भवन नहि, बल्कि परंपरा, श्रद्धा आ कला आत्मा प्राप्त करैत अछि। वंशी पहाड़पुरक ई विशेष प्रस्तर आब सीतामढ़ीक धार्मिक पर्यटन कें नव आयाम देबाक दिशा मे अग्रसर अछि। मां जानकी मंदिर निकट भविष्य मे श्रद्धा आ भारतीय वास्तुकलाक भव्य प्रतीकक रूप मे स्थापित होयत।



