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Sunday, April 26, 2026

जामताड़ा मे 45 वर्ष पुरान पुल धंसल, सैकड़ो गामक संपर्क जिला मुख्यालय सं टुटल

जामताड़ा । जिला मे मंगलदिन एकटा गंभीर आपदा देखल गेल जखन दक्षिण बहाल क्षेत्र स्थित लगभग 45 वर्ष पुरान पुल, जे 1980 मे बोल्डरक सहारे बनाओल गेल छल, अचानक धंसि पड़ल। एहि पुलक धंसि जेबाक कारण सं सैकड़ों गामक जिला मुख्यालय सं संपर्क पूर्णतः विच्छिन्न भ’ गेल अछि। ई पुल जामताड़ा जिलाक मुख्य जीवनरेखा मानल जाइत छल, जे आब ध्वस्त भ’ गेल अछि।

18 जुलाई 2025 कें लगातार भेल भारी वर्षा सं ई पुल पहिले सं क्षतिग्रस्त भ’ गेल छल। ओहि दिन सं पुल पर केवल छोट दोपहिया वाहनक आवाजाही होइत रहल। मुदा 11 दिनक भीतर पुलक स्थिति एतेक गंभीर भ’ गेल जे आब ओ पूर्णतः धंसि पड़ल अछि। प्रशासन द्वारा तत्क्षण पुल पर गाड़ीक परिचालन पूर्णतः प्रतिबंधित कए देल गेल अछि।

पुल टूटबाक कारण आमजनक दैनिक जीवन बुरी तरह सं प्रभावित भ’ गेल अछि। पहिले जते दूरी मात्र आधा किलोमीटर छल, आब लोक केँ जिला मुख्यालय धरि पहुंचबाक लेल 15 सं 20 किलोमीटर धरि घूमिकए यात्रा करय पड़ि रहल अछि। एहि कारण सदर अस्पताल, केंद्रीय विद्यालय, आईटीआई, सेंट एंथनी स्कूल आदिक छात्र, शिक्षक, मरीज आ कर्मी सभकेँ भारी असुविधा भ’ रहल अछि।

विशेष रूप सं छात्र-छात्रा आ दैनिक मजदूर वर्ग एहि आपदा सं सर्वाधिक प्रभावित भेल छथि। सैकड़ों विद्यार्थी स्कूल आ कॉलेज नहि पहुंचि पा रहल छथि, जाहि सं हुनक पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ि रहल अछि। दोसर दिस, शहर मे मजदूरी कएनिहार सैकड़ों ग्रामीण आब रोजी-रोटी सं वंचित भ’ रहल छथि, जे हुनक आजीविका लेल संकटक कारण बनि गेल अछि।

ई पुल जामताड़ा आ देवघर जिलाक बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग छल। रोज हजारोंक संख्या मे दोपहिया आ भारी वाहन एहि पर सं आवागमन करैत छल। आब ई संपूर्ण रूप सं बाधित भ’ गेल अछि।

नदी मे पानि केर तीव्र प्रवाह सं दुर्घटनाक आशंका सेहो बनल अछि। प्रशासन घटनाक सूचना पाबि स्थल पर पहुंचल आ लोक केँ क्षतिग्रस्त पुलक नजदीक जाए सं रोकि रहल अछि। जिलाधिकारी द्वारा पुल पर बैरिकेडिंग करबाक निर्देश देल गेल अछि। उपविकास आयुक्त (एसडीएम) अनंत कुमार जनतब देलनि जे वैकल्पिक मार्गक दुरुस्तीकरण लेल आदेश देल गेल अछि तथा नव पुल निर्माणक प्रस्ताव संबंधित विभाग केँ पठाओल जाएत।

स्थानीय लोकनिक मांग अछि जे यथाशीघ्र नव पुल निर्माण आरंभ होए आ अस्थायी वैकल्पिक रास्ता तैयार कएल जाए, ताकि जनजीवन सामान्य होए। एहि आपदा सं प्रशासनक पूर्व तैयारी पर प्रश्न उठल अछि आ एहि तरहक आधारभूत ढांचाक निगरानी हेतु नव रणनीति आवश्यक देखार भ’ रहल अछि।

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