– राज्यसभा सदस्य संजय झा कहलनि, ई डेग मिथिलाक सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण दिशा मे महत्वपूर्ण मानल जा रहल अछि
मधुबनी, समदिया
मधुबनी जिलाक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल बलिराजगढ़ मे स्थित प्राचीन गढ़क अवशेष पर वैज्ञानिक उत्खनन कार्यक स्वीकृति प्रदान कएल गेल अछि। ई स्वीकृति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा देल गेल अछि, जाहि सं मिथिला क्षेत्रक इतिहास अध्ययन मे नव अध्याय जुड़बाक संभावना व्यक्त कएल जा रहल अछि। उल्लेखनीय अछि जे बलिराजगढ़ कें स्थानीय परंपरा मे राजा बली सं जोड़ि कए देखल जाइत अछि। दीर्घ समय सं इतिहासकार, पुरातत्वविद् आ स्थानीय नागरिक एहि स्थल पर व्यवस्थित उत्खननक मांग करैत रहल छथि। एखन एहि दिशा मे ठोस पहल भेला सं क्षेत्रवासी मे हर्षक वातावरण अछि।
एहि संदर्भ मे राज्यसभा सदस्य संजय झा जनतब देलनि जे केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय आ एएसआईक वरिष्ठ पदाधिकारीसभ सं हुनकर लगातार संवाद चलि रहल छल। अंततः आवश्यक औपचारिकता पूर्ण भेला उपरांत उत्खनन कार्यक स्वीकृति भेटल। ई डेग मिथिलाक सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण दिशा मे महत्वपूर्ण मानल जा रहल अछि।
उत्खनन लेल निर्धारित क्षेत्र कें स्थल योजना (साइट प्लान) मे लाल रंग सं चिह्नित कएल गेल अछि। ई कार्य एएसआईक पटना परिपथ अंतर्गत अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरि ओम शरणक निर्देशन मे संपन्न होयत। वैज्ञानिक पद्धति सं परत-दर-परत खुदाई कएल जाएत, जाहि सं प्राचीन निर्माण-शैली, नगर-योजना, मृद्भांड, धातु-वस्तु अथवा अन्य सांस्कृतिक अवशेष प्राप्त होएबाक संभावना अछि।
इतिहासकार सभक मानब अछि जे बलिराजगढ़ मिथिला क्षेत्रक प्राचीन नगरीय सभ्यताक महत्वपूर्ण केंद्र रहल भए सकैत अछि। यदि उत्खनन सं पर्याप्त पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त होइत अछि, तं मिथिलाक प्राचीन राजनीतिक, सामाजिक आ आर्थिक संरचनाक संबंध मे ठोस जानकारी उपलब्ध भए सकैत अछि। एतय प्राप्त अवशेष क्षेत्रक सांस्कृतिक निरंतरता आ ऐतिहासिक महत्त्व पर नव प्रकाश देत।
एहि पहल सं ने केवल शैक्षणिक जगत लाभान्वित होयत, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटनक संभावना सेहो बढ़त। मधुबनी जिला आ व्यापक रूपें मिथिला क्षेत्र लेल ई गौरवक विषय मानल जा रहल अछि। स्थानीय नागरिक आशा व्यक्त करैत छथि जे उत्खनन कार्य पारदर्शी, वैज्ञानिक आ समयबद्ध ढंग सं सम्पन्न होयत, जाहि सं बलिराजगढ़क प्राचीन वैभव विश्व समक्ष स्पष्ट रूपें उद्घाटित भए सकय।



