रांची।
झारखंड विधानसभा केर मानसून सत्र एक अगस्त सं आरंभ भ’ गेल अछि, जे सात अगस्त 2025 धरि चलत। सत्रक पहिल दिन, शुक्रदिन केँ, दिवंगत आत्मासभक शांति आ परिजनसभ केँ शोक सहन करबाक क्षमता लेल सदन मे मौन राखल गेल। तत्पश्चात सभा केर कार्यवाही कें सोम 11 बजे धरि स्थगित क’ देल गेल।
सत्रक प्रारंभ सं पूर्व, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो द्वारा बृहस्पति कें सर्वदलीय बैठक बजाओल गेल छल, जाहि मे सत्तापक्ष आ विपक्षक प्रमुख नेतासभ भाग लेलनि। ई सत्र कुल पाँच कार्य दिवसक होयत। चारि अगस्त केँ वित्तीय वर्ष 2025-26 लेल अनुपूरक बजटक प्रस्तुति हेतय, जाहि पर प्रश्नकाल संग सामान्य वाद-विवाद आ मतदान उपरांत पारित कएल जायत।
सप्ताहभरि रहत प्रश्नकाल, विधेयक पर होयत चर्चा
पाँच अगस्त केँ सेहो प्रश्नकाल निर्धारित अछि। छह अगस्त केँ प्रश्नकालक बाद विभिन्न विधेयक आ अन्य सरकारी कार्य सभ लाओल जायत। सत्रक अंतिम दिन, सात अगस्त केँ, गैर सरकारी संकल्पसभ पर चर्चा कएल जा सकत आ तत्पश्चात सत्र समापन हेतय।
अतिवृष्टि सं जनजीवन पर पड़ल प्रभाव पर विशेष चर्चा संभावित
सर्वदलीय बैठक मे निर्णय लेल गेल जे छह अगस्त केँ झारखंड मे भेल अतिवृष्टि सं जनजीवन पर पड़ल प्रभाव विषय पर विशेष चर्चा कएल जा सकैत अछि। एक अगस्त केँ कार्य मंत्रणा समिति केर बैठक मे एहि पर अंतिम निर्णय लेल जायत।
वर्तमान मुद्दासभ पर चर्चा होय त लोकतंत्रक लेल शुभ: मरांडी
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी कहलनि जे कानून व्यवस्था, बाढ़ सं भेल क्षति आ विकास कार्यसभक ठप पड़बाक मुद्दा पर सदन मे चर्चा होय तं ई लोकतंत्रक लेल सकारात्मक संकेत होयत।
केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थासभक दुरुपयोग कए रहल अछि: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार केँ सत्तापक्ष केर विधायसभ सं भेंट कए सत्रक रणनीति बनौलनि। ओ कहलनि जे महागठबंधन एकजुटता संग एसआईआरक विरोध करत। मुख्यमंत्रीक अनुसार, बिहार मे जे स्थिति बनाओल जा रहल अछि, ताहि सं स्पष्ट अछि जे केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थासभक दुरुपयोग क’ रहल अछि। ओ कहलनि जे इंडिया गठबंधन चुनाव आयोगक निर्णय केर विरोध मे ठाढ़ अछि। मुख्यमंत्री सरना धर्म कोड आ ओबीसी आरक्षण पर स्पष्ट कएलनि जे राज्य सरकार पूर्वहि विधानसभा सं प्रस्ताव पारित क’ अपन सहमति प्रकट क’ चुकल अछि, मुदा निर्णय लेबाक जिम्मेदार लोक कुंडली मारि क’ बैसल छथि। महागठबंधन फेर सशक्त स्वर मे ओहि लोकनिक कान धरि अपन आवाज पहुँचायत। एहि तरहें मानसून सत्रक दौरान राजनीतिक आ सामाजिक रूप सं महत्वपूर्ण मुद्दासभ पर तीव्र बहस आ निर्णयक संभावना बनि रहल अछि।



