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Thursday, April 16, 2026

मधुश्रावणी पाबनि शुरू : नवविवाहिताक व्रत आ लोकपूजा आरंभ

शिवाजीनगर (समस्तीपुर), समदिया

मिथिलाक सांस्कृतिक परंपरा सं जुड़ल मधुश्रावणी पाबनि आइ सं श्रद्धा आ उल्लास संग शुरू भ’ गेल। शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत बंधार, बल्लीपुर, करियन, दसौत, बुनियादपुर, लक्ष्मीनिया सहित कतेको गाम मे नवविवाहित महिला लोकनि अपन पतिक दीर्घायु, सौभाग्य आ पारिवारिक सुख-शांति लेल व्रत, पूजा आ लोकगाथा केर श्रवण प्रारंभ केलनि।

ई पाबनि साओन कृष्णपक्ष पंचमी तिथि सं आरंभ भ’ क’ साओन शुक्ल तृतीया धरि अर्थात् 27 जुलाई धरि चलत। नवविवाहिताक लेल ई पर्व विशेष महत्व रखैत अछि। सोमदिन, पूर्व संध्या पर, नवविवाहिता सभ द्वारा उपवन सं फूल-पत्ती तोड़ि डलिया मे सजा क’ शिव मंदिर मे सखी-सहेली संग गीत गबैत परंपरा अनुसार आगमनक स्वागत कएल गेल।

“कथी म लोढ़ब हे, बेली चमेली…” आ “कथी म अरुहुल फूल मलिया बारी मे…” सन पारंपरिक गीत सं गामक माहौल भक्तिमय भ’ गेल। पंडित दुखहरण झा उर्फ फलाहारी बाबा बतौलनि जे ई पर्व प्रकृति आ नागदेवी नागेश्वरी माता केर आराधना केर प्रतीक थिक। महिलाएं प्रतिदिन गाछी सं फूल-पत्ता चुनि नागदेवता, शिव-पार्वती सहित आन देवता पर चढ़ाबैत छथि।

पूजा विधि मे महिला पंडितक भूमिका महत्वपूर्ण होइत अछि जे प्रत्येक दिन नव कथा – जाहिमे सावित्री-सत्यवान, राम-सीता, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती आ नागदेवता केर कथा शामिल रहैत अछि – कें प्रस्तुत करैत छथि।

समापन दिन, अर्थात् श्रावण शुक्ल तृतीया कें “टेमी” नामक परंपरा निमाहल जाइत अछि, जाहि मे नवविवाहिताकें ठेहुन आ पैर पर बाती सं दागल जाइत अछि। मान्यता अछि जे जकरा फफोला उठैत अछि ओ सौभाग्यवती होइत छथि।

पाबनि मे नवविवाहिता कें ससुराल पक्ष सं वस्त्र, चूड़ी, गहना, पूजा सामग्री आ विशेष व्यंजन पठाओल जाइत अछि। व्रती स्त्री सभ हरा रंगक साड़ी, चूड़ी धारण क’ सभ दिन पूजा-अर्चना करैत छथि। प्रत्येक संध्या भगवती गीत, कोहबर गीत आ विद्यापतिक पद सं वातावरण भक्तिभाव सं गूंजैत रहैत अछि।

मधुश्रावणी पाबनि मात्र धार्मिक आयोजन नहि, बल्कि मिथिलाक स्त्री श्रद्धा, पारिवारिक मूल्य आ लोकसंस्कृतिक जीवंत अभिव्यक्ति थिक।

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