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Friday, April 17, 2026

बलिराजगढ़ मे फेर शुरू भेल उत्खनन : मिथिलाक प्राचीन शहरी सभ्यता पर पड़त नव प्रकाश

– एहि पहल सं मिथिलाक सांस्कृतिक पहिचान होयत सुदृढ़

मधुबनी, समदिया

मधुबनी जिला अंतर्गत अवस्थित ऐतिहासिक स्थल बलिराजगढ़ मे शनि सं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) द्वारा पुनः उत्खनन कार्यक औपचारिक शुभारंभ कएल गेल अछि। ई पहल केवल मधुबनी नहि, बल्कि संपूर्ण मिथिला क्षेत्र लेल महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि मानल जा रहल अछि। कार्यक्रम मे राज्यसभा सांसद आ संसदीय समिति (परिवहन, पर्यटन आ संस्कृति) केर अध्यक्ष संजय कुमार झा, सांसद रामप्रीत मंडल, विधायक मीना कामत तथा जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा, एसपी योगेंद्र कुमार सहित अनेक वरीय पदाधिकारी उपस्थित छलाह।

बलिराजगढ़ पर पूर्व मे 1962-63, 1972-73 आ 2013-14 मे प्रमुख उत्खनन कएल गेल अछि। विशेष रूप सं 2013-14 केर खुदाई मे 400 सं अधिक प्राचीन वस्तु प्राप्त भेल छल। एहि स्थल सं पांच सांस्कृतिक चरण – उत्तरी कारी पॉलिशदार मृदभांड, शुंग, कुषाण, गुप्त आ पाल कालक प्रमाण भेटल अछि, जे लगभग 700 ईसा पूर्व सं 12म शताब्दी धरि निरंतर बसावट केर संकेत दैत अछि। ई तथ्य मिथिलाक प्राचीन सभ्यताक दीर्घकालीन विकास कें स्पष्ट करैत अछि।

उत्खनन मे प्राप्त प्रमुख संरचनात्मक अवशेष सभ मे विशाल किलाबंदी दीवार विशेष उल्लेखनीय अछि, जे माटिक ईंटा आ पक्का ईंटाक संयोजन सं निर्मित छल। एहि दीवारक आधार चौड़ाई लगभग 5.18 मीटर आ ऊपरी भाग 3.65 मीटर रहल अछि। विशेषज्ञ सभक मतानुसार ई संरचना केवल सुरक्षा नहि, बल्कि कमला नदीक बाढ़ि सं संरक्षण लेल विकसित उन्नत इंजीनियरिंग प्रणालीक उदाहरण अछि। आवासीय भवन, इनार, रिंगवेल आ पक्का नाली सन अवशेष लगभग 2000 वर्ष पूर्व विकसित शहरी जीवन शैलीक प्रमाण प्रस्तुत करैत अछि।

मृदभांड सभ मे उत्तरी कारी पॉलिशदार मृदभांड विशेष महत्व राखैत अछि, जे गंगा घाटीक द्वितीय शहरीकरण काल सं संबंधित अछि। एहि प्रकारक सामग्री बलिराजगढ़क प्राचीन प्रमुख नगर केंद्र जना पाटलिपुत्र आ वैशाली सं जोड़ैत अछि। 2013-14 केर उत्खनन मे प्राप्त टेराकोटा मूर्ति, मनका, आभूषण अंश, ताम्र सिक्का, पंच-चिह्नित मुद्रा, लौह औजार तथा अस्थि निर्मित उपकरण सभ सं प्राचीन मिथिलाक कला, व्यापार, सामाजिक जीवन आ तकनीकी प्रगतिक जानकारी भेटैत अछि। लौह उपकरण लगभग 2300 वर्ष पूर्व विकसित धातुकर्म ज्ञानक प्रमाण दैत अछि।

विशेषज्ञ सभक अनुसार बलिराजगढ़ विदेह अथवा मिथिला क्षेत्रक प्रारंभिक किलेबंद शहरी केन्द्र रहल अछि, जतय प्रशासन, जल प्रबंधन, रक्षा व्यवस्था आ शिल्प कला विकसित अवस्था मे छल। यद्यपि पूर्व उत्खनन सीमित क्षेत्र मे भेल आ 2014 मे भूजल स्तर उच्च रहबाक कारण कार्य स्थगित करए पड़ल, तथापि स्थलक बहुत भाग एखनहुं अन्वेषण सं बाहर अछि।

नव उत्खनन सं मौर्य-पूर्व अथवा लौह युग सं संबंधित आर गहन साक्ष्य प्राप्त होयबाक संभावना अछि। एहि सं मिथिलाक सांस्कृतिक परंपरा, व्यापारिक संबंध आ प्राचीन बाढ़ि प्रबंधन प्रणाली पर नव प्रकाश पड़त। एहि पहल सं मधुबनी जिला मे पर्यटन विकास, रोजगार सृजन आ सांस्कृतिक पहिचान के सुदृढ़ करबा मे महत्वपूर्ण योगदान भेटबाक आशा व्यक्त कएल जा रहल अछि।

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