-सोनी चौधरी
मधुमास साओन भगवान शिव केर सब सँ प्रिय मास अछि। तें हिंदू धर्मावलंबी लेल ई मास अत्यंत पवित्र मानल जाइत अछि। ई मास एहि बेर 22 जुलाई सँ शुरू भऽ 19 अगस्त कें खत्म होयत। एहि बेर ई मास अनेक मानेमे खास अछि। जतय साओन मासक आरंभ सोमदिन सँ भऽ रहल अछि ओतहि एकर समापन सेहो सोमदिन होयत। संगहि एहि बेर साओनमे पाँचटा सोमवारी सेहो पड़ि रहल अछि। पहिल सोमवारी 22 जुलाई कें, दोसर 29 जुलाई कें तेसर 5 अगस्त, चारिम 12 अगस्त आ पाँचम सोमवारी 19 अगस्त कें पड़त। एकरा संगहि साओन मासक प्रत्येक मंगल कें माता पार्वती लेल मंगला गौरी व्रत रखबाक सेहो परंपरा अछि। एहि बेर साओनमे कुल चारिटा मंगला गौरी व्रत होयत। पहिल मंगला गौरी व्रत 23 जुलाई कें, दोसर 30 जुलाई कें, तेसर 6 अगस्त आ चारिम मंगला गौरी व्रत 13 अगस्त कें कयल जायत।
साओन मास भगवान शंकर केर परम प्रिय मास थिक। नित्य पूजा पाठक विधान आदिकाल संँ आबि रहल अछि। पुराणमे सोम दिन शिव पूजाक महत्व विशेष मानल गेल अछि, जे एहि बेर मासक आरंभ आ समापन कुल पाँच टा पड़ि रहल। कहल जाइछ जे प्रबोधनी एकादशीसँ (साओन केर प्रारंभ) सृष्टिक पालन कर्ता भगवान विष्णु पाताललोकमे स्थित अपन दिव्य भवनमे विश्राममे रहैत छथि। ओ सबटा काज भार महादेवकेँ सौंपि दैत छथि। भगवान शिव अपन अर्धांगिनी पार्वती संग पृथ्वी लोक पर विराजमान रहिकें पृथ्वी वासीक दुःख-दर्द दूर करैत छथि आ एहि समयमे हुनकर अराधना केनिहार भक्त केर सभ मनोकामना पूर्ण करैत छथि।
ध्यातव्य अछि जे महादेव स्वयं सनतकुमार संग साओन मासक महिमाक अनुपम बखान कयने छथि। महादेवक तीनहुंँ नेत्रमे सूर्य दायाँ, चन्द्र बायाँ आ अग्नि मध्य नेत्रमे छथि। हिन्दू कैलेण्डरमे मासक नाम नक्षत्रक आधार पर राखल गेल अछि। वर्षक पहिल मास चैत अछि, जे चित्रा नक्षत्र केर आधार पर अछि। तहिना साओन मासक नाम श्रवण नक्षत्रक आधार पर रखल गेल अछि। श्रवण नक्षत्रक स्वामी चन्द्र छथि जे भगवान भोलानाथक मस्तक पर विराजमान छथि। जखन सूर्य कर्क राशिमे प्रवेश करैत छथि तखन साओनक मास प्रारंभ होइत अछि। सूर्य गर्म आ चन्द्र ठण्डक प्रदान करैत छथि। ताहिसँ सूर्य केर कर्क राशिमे अयलासंँ झमाझम बरखा होइत अछि। कहल जाइछ जे लोकक कल्याणक लेल विष ग्रहण कयनिहार सभ देवक देव महादेव कें एहि मासमे ठण्डक आ सुकून भेटैत छनि। एहि कारण साओन मासक शिव संग सर्वाधिक प्रेम आ आत्मीय संबंध कायम होयबाक बात कहल जाइछ।
शिव भक्तकें सदति ई विश्वास बनल रहैत छनि जे साओन मासमे औढ़रदानी भगवान महादेव केर पूजा अर्चना कयलासँ मनोवांछित फल अवश्य भेटत।
साल भरिक बारह मासमे साओन एकटा एहन मास अछि जकर नाम सुनिते मन मस्तिष्कमे अजीब तरहक उमंगक भाव जागि उठैत अछि, उत्सवधर्मिता जागृत भऽ उठैत अछि। जेना लगैछ जे साओन प्रकृति केर शृंगार हो, प्रेमक भाव हो। साओन केर वातावरणमे समायल लालित्य ओ हरीतिमा केर निखार देखि सहजहिं लगैछ जेना ई मास प्रेम केर अनुपम विस्तार हो। साओन अबिते हमरा लोकनिक भीतर उमंग, उत्साह, उल्लास आ संगीत मुखर भऽ उठैत अछि। चारू कात पसरल हरियरी, गाछीमे पड़़ल झूला, असमानमे छाओल कारी-कारी मेघ आ लहलहाइत धानक खेत एना लगैछ जेना धरती रंगबिरही आँचर ओढ़ि लेने हो। रिमझिम बरखामे माटिक सोन्हगर सुगंधमे लेपटायल पपीहाक टेर, झींगुर केर आवाज आ चारसँ खसैत बूंद वातावरणमे एकटा अलग तरहक ध्वनि आ ब्रह्मनाद उत्पन्न करैत अछि।

प्रकृति केर आंगनक ई मनभावन दृश्य देखि मन बरबस मधुर गान गाबय लगैत अछि। तेँ वर्षा ऋतुकें गीतक ऋतु सेहो कहल जाइत अछि। ओना तऽ पावस केर गीत चारि महीना धरि गाओल जाइत अछि। मुदा एहिमे साओन केर महीना विशेष अछि। कारण साओन प्रेमक मनभावन महीना आ गीत-संगीत प्रेमक सबसँ सशक्त अभिव्यक्ति अछि। ओहूमे लोकगीत जे हमर आत्माक स्वर अछि, जे सभ श्रोताक मनकें प्रेमरस सँ सराबोर कऽ दैत अछि।
ई साओन महीना सभतरि प्रेम केर पटौनी करैत अछि। सुखायल नर–नहर, ताल–तलैया, गाछ-वृक्ष सभ हरियर भऽ जाइत अछि। धरती केर तपिश आ असमान केर गर्मी सहजहिं सुस्त पड़ि जाइत अछि। संभवतः तें साओन मासमे भगवान भोलानाथक पूजा-अर्चना , जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, जप इत्यादि केर विशेष महत्व अछि। एहि मासमे शिवशक्ति केर पूजासँ सभ मनोकामना पूर्ण होइत अछि। साओन शब्द सुनतहिं उत्सवधर्मिताक भाव जागैत अछि। मोन भक्ति भाव केर उमंगसँ भरि जाइत अछि।
धर्म ग्रंथक मुताबिक हजारों सालक तपस्याक बाद गौरी कें पति रूप मे शिव एही मासमे भेटल छलथिन। तें प्रकृति केर शृंगार, प्रेम भाव, लालित्य, हरियरी केर निखार आ प्रेमक विस्तार साओन मासमे अति विशिष्ट भऽ जाइत अछि। साओन अबिते उत्साह आ उल्लासक संग गीत आ संगीत मुखर भऽ जाइत अछि। बाबाक नचारी, भजन, कजरी, बटगवनी सँ प्रकृति झूमि उठैत अछि। बाबा धाम लेल कमरथुआक टोली शंखनाद करैत नचारी गबैत, शिवतांडव, पंचाक्षर, रुद्राष्टकम, लिंगाष्टकम, कांवर गीत संग नृत्य करैत गंगा नदीसँ काँवड़मे गंगाजल बोझि फूल बेलपात, अक्षत आ चानन शिवलिंग पर अर्पित करैत छथि।
प्रकृति केर आँगनमे चहुँदिस पसरल अद्भुत मनभावन दृश्य देखि हृदय प्रेम भावमे विभोर भऽ बरबस मधुर गीत गाबि उठैत अछि। एहिमे लोकगीत मिथिलाक आत्मा थिक। जन जन केर आत्मिक भाव केर अभिव्यक्ति लोकगीत द्वारा स्वरबद्ध भऽ प्रकृतिमे संगीतमय रमणीक वातावरण प्रस्तुत करैत अछि।
साल भरिक प्रतीक्षाक बाद भाइ बहिनक पाबनि राखी अबैत अछि । धिया नैहरक आमंत्रण केर बाट जोहैत छथि। साओनमे बेटी नैहरक गाछीमे झूला पर झुलैत जखन कजरी गबैत छथि, तखन तन आ मन केर विह्वल भाव हृदयकें आनंदित कऽ दैत अछि। नैहरक अपनत्व, स्वतंत्रता, माता-पिता, भाइ-बहिन, सखी बहिनपाक सान्निध्य प्रति वर्ष साओनमे धिया कें आकर्षित करैत रहल अछि।
जेना कि धरती एहि मासमे साल भरिक जल संचय कऽ तरलता आ सरसतासँ सराबोर रहैत अछि तहिना धियाक संघर्षपूर्ण दिनचर्यामे साओन मास अमृत भरिकें नैहरक प्रेमभावमे डुबिकें अमरत्व प्रदान करैत अछि।

साओन मास प्रेमी सभक लेल प्रिय मास थिक। स्त्रीक शृंगार, सौभाग्य आ मनुहार एहि मासमे प्रियतम लेल विशेष रूप सँ निखरैत अछि। बुजुर्ग लोकनि आशीर्वादमे सदिखन हरियर बनल रहबाक बात कहैत छथि। हरियर रंग चिर सौभाग्यक प्रतीक सेहो मानल गेल अछि। वर्षाक बूंदक निरंतरताक प्रतिवर्ष इंतजार केर नाम थिक साओन। पूर्वज द्वारा शोध कयलाक बाद किछु अभूतपूर्व तथ्य कहल गेल अछि : कारी मेघ आकाशमे घुमरि रहल हो तऽ तेज वर्षाक संभावना रहैत अछि। कारी मेघ देखि मोर मदमस्त भऽ नाचि उठैत अछि आ पूर्ण रूपेण तेज वर्षाक संभावना बनैत अछि। मिथिलामे एहन सटीक अवलोकन क्षमता अद्भुत अछि। बरसात मे खानपान सेहो अलग भऽ जाइत अछि। रिमझिम साओनमे चाह केर स्वाद सेहो अलग लगैत अछि। अरबीक पत्ता, बरसाती लताम , जामुन, दूधिया भुट्टा सहित अनेको फल-फूल केर आनंद अद्भुत रहैत अछि। खान पानक संयम अति आवश्यक अछि । बूढ़-बुजुर्ग लोकनिक मुताबिक साओनमे दिनमे भोजन एक्के बेर करबाक चाही, भादोमे साँझ के बाद भोजन नहि करबाक बात कहल गेल अछि। ओ एहि मासमे विषैला कीड़ा सभक प्रकोप बढ़ि जयबाक कारण साग-पातक उपयोग भोजनमे कमसँ कम करबाक बात कहलनि अछि। एहिना दूध आ सागक प्रयोग निषेध मानल गेल अछि।
ईहो कम महत्वपूर्ण नहि जे बारहो मासमे एकमात्र साओन मास एहन अछि जे खेतिहर किसान लोकनि लेल सेहो आनंद आ विश्रामक मास होइत अछि। एहि समयमे खेतमे धान लागल रहैत अछि आ किसान अपेक्षाकृत फुरसतमे रहैत छथि। साओनक झिहिर-झिहिर बुन्नमे दुआरि आ दलानसंँ कजरी आ आल्हा केर गूंजमे हृदय केर मृदुल भाव संस्कृति आ परंपरा केर अद्भुत संगम प्रस्तुत करैत अछि। शब्द चित्रण केर मुताबिक कजरी गीतमे वर्षा ऋतु केर सुंदर भावक सजीव चित्रण भेटैत अछि। कजरी केर साहित्य पक्ष अत्यंत समृद्ध अछि। एहि पावन मासमे कजरी, झूला, साओनी, चौमासा-बारहमासा आदि गयबाक दीर्घ परंपरा रहल अछि:
सखि हे! रिमझिम बरसै साओन
औथिन मोर मनभावन ना…!
कारी कारी मेघा बरसै
नयना नित पिय मिलन कें तरसै
अगन लगाबै ना
हिया बीच उधम मचाबै ना…!
जखन टिप-टिप बुन्नी बरसैत अछि आ कजरी ओ पावस गीत वातावरणमे गुँजायमान होइत अछि, तखन बाट-बटोही सेहो रस्ता बिसरि मन मुग्ध भऽ बेसुध भऽ जाइत छथि आ ओ सहजहिं गाबि उठैत छथि –
कमल नयन मन मोहन रे बसु यमुना तीरे
बसिया बजाय मन हरलक रे चित रहय ने थीर।
खन मोहन वृन्दावन रे खन बसिया बजाय
सन सन रहय अहीं संग रे बंशीवट धारे।
जौं हम जनितौं एहन सन रे तेजि जयता गोपाले
अपन भरम हम तेजितहुँ रे सेवितहुँ नन्दलाले।
जाय ने क्यो यमुना तट रे छथि निकट गोपाले
बाँ पकड़ि झिकझोरलनि रे संग लए ब्रजबाले।
जौं जदुपति नहि आओत रे दह यमुना के तीरे
हमहुँ मरब हरि-हरि कय रे छुटि जायत पीरे।
साओनक हरियरीमे डूबल वातावरणमे माटिक मनमोहक सुगंधमे हवाक झोंक पर झुमैत गाछक डारि, उफनैत नदी, मेघक मल्हार केर अठखेली पर प्राकृतिक तान दैत चिड़ै चुनमुनी केर कलरव, वर्षा केर फुहार आ जलधारसँ नहायल प्रकृति पर जखन सूरजक स्वर्णिम किरण पड़ैत अछि, तखन प्रकृति केर सौंदर्यमे चारि चान लागि जाइत अछि। आकाशमे मेघक गर्जन सुनि कें लगैत अछि जेना खाम्ह पर लागल चिमनी बेर-बेर चौंकि रहल हो। एहन मनभावन ऋतुमे घर-अंगना सभ सोहाओन लगैत अछि। एहन रम्य आ काम्य ऋतुमे कोनो नव पाहुन केर अयबाक खुशी सम्पूर्ण प्रकृतिमे पसरल रहैत अछि।
ग्वाला लोकनि बंशी बजबैत बोनमे मालजाल चरबैत छथि। भीजल गाय, महीस, बकरी आदि पशुक संग गाछी, खेत, मैदान, सड़क पर चरवाहा सब जेना उत्सव मनबैत अछि। गाम घरक युवती बूंदक फुहार देखि गाछी दिस सहजहिं दौड़ि जाइत छथि। पीपर आ आमक गाछमे डोरी बान्हि झूला झूलबामे मगन भऽ जाइत छथि। हवामे उड़ैत केश आ आँचर केर कोनहुँ ठेकान नहि रहैत छन्हि।
ई कहब अतिश्योक्ति नहि जे साओन मासमे गीत-संगीतक अलग आ अद्भुत महत्व सदति बनल रहैत अछि। बूंदक फुहारक संग प्रेम गीत एक दोसरा केर पूरक बनल रहैत अछि। छम-छम बूंदक बीच सखी सभक हास परिहास, सासु ननदिक उलहन उपराग, पिया संग रूसब आ मनायब सबहक अद्भुत आनंद होइत छैक। एहि ऋतुमे कामदेवक वाण चहुँदिस वातावरण कें प्रेममय बनौने रहैत अछि। महुआ, केवड़ा आ टेसूक फूलक गंधसँ अभिभूत मोन कोइलीक कू कू आ पपीहाक पीहू पीहू सुनि भाव विभोर भऽ जाइत अछि।

वर्षा एकटा एहन ऋतु अछि जाहिमे प्रियतमा केर संयोग आ वियोग दुनू रूप निखरि कें सामने अबैत अछि।
जलवायु परिवर्तन भेला सँ ऋतु अपन चक्र बदलैत रहैत अछि । पंचांगक मुताबिक साओन मास आबि जाइत अछि। मुदा पहिने जेकाँ बरखा आब कहाँ होइत अछि? प्रकृति संग मनुक्ख केर छेड़छाड़ प्राकृतिक आपदाक कारण बनि रहल अछि आ बोन झांखुर हरियरी विहीन भऽ रहल अछि। तकर बावजूद मानव-हृदय अदम्य अछि जाहिमे ऋतुचक्र आदिम आ सनातन अछि । खेत, नदी, ताल-तलैया, पोखरिक महार वर्षाजलसँ भरल, बिजली चमकैत, मेघ गरजैत, गाछ वृक्ष झुमैत, झींगुर-बादुर केर झझनाइत आवाज, पारंपरिक विरह ओ मिलन गीत संग साओनक आनंद अतुलनीय अछि। अपन मिथिलाक बटगबनी जे सभक हृदयमे बसल अछि –
तरुणी बयस मोर बीतल सजनी गे
पहु बिसरल मोर नाम
कुसुम फुलय, फूल मौलल सजनी गे
भ्रमरो ने लय विश्राम
सिर सिन्दूर नहि भाबय सजनी गे
मुरूछि खसय एहि ठाम
युगल नयन मन व्याकुल सजनी गे
थिर नहि रहय गियान
विद्यापति कवि गाओल सजनी गे
ई थिक दुखक निदान।
(लेखिका ख्यातिलब्ध गायिका आ कवयित्री छथि।)



