– घरेलू बाजार पर सेहो देखा रहल अछि एकर प्रभाव
– निर्यातक ठहराव सं व्यापारी आ किसान दुनू कें भए सकैत अछि नुकसान
पटना, समदिया
पश्चिम एशिया मे चलि रहल युद्धक सीधा असरि मिथिलाक सुपर फूड मखाना पर पड़ल अछि। मिथिला सं निर्यातक लेल विदेश पठाओल गेल मखान जहाज आ विदेशी गोदाम मे फंसल रहल। एहि परिस्थिति सं पूरा व्यापार चक्र प्रभावित भए गेल आ निर्यात पर निर्भर व्यापारी सभक समस्या बढ़ि गेल। एहि संकटक असरि आब घरेलू बाजार मे स्पष्ट देखाय दए रहल अछि। जतय पहिने मखान 800 टके प्रति किलो बिकाइत छल, ओ आब घटि कए करीब 500 टके प्रति किलो पर पहुंचि गेल अछि। मांग मे कमी आ निर्यातक ठहराव सं बाजार पर दबाव बढ़ल, जाहि सं व्यापारी आ किसान दुनू कें नुकसान उठेबाक पड़ि रहल अछि।
निर्यात ठप, व्यापारीक चिंता बढ़ल
मखान व्यापारी कहैत छथि जे नव मालक निर्यात पूरी तरह ठप भए गेल अछि। पहिने पठाओल गेल माल सेहो विदेशी गोदाम मे पडल अछि आ बिकि नहि रहल अछि। एहि कारण नव ऑर्डर नहि भेटि रहल अछि, जाहि सं पूंजी फंसल अछि। व्यापारी सभक लेल ई चिंता सेहो बनि गेल अछि जे आगूक खेती आ उत्पादन कोना जारी राखल जाए।
सप्लाई चेन टूटल, अरब देश मे मांग प्रभावित
मखान व्यापारी रामप्रवेश सहनीक अनुसार, अरब देश मे मखानक व्यापक खपत अछि, मुदा पश्चिम एशियाक देशसभक बीच चलि रहल युद्धक कारण सप्लाई चेन पूर्ण रूप सं टूटि गेल अछि। जहाजक आवाजाही ठप्प भए गेलाक कारण स्थिति आर गंभीर भए गेल। निर्यात ठप्प भए गेल आ घरेलू बाजार मे दाम 200 सं 300 टके प्रति किलो गिरल, जाहि सं व्यापारी सभक भारी आर्थिक नुकसान भए रहल अछि।
आर्थिक संकटक आशंका
व्यापारी सभ कहैत छथि जे यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार जल्दिये सामान्य नहि भेल, तं एहि व्यवसाय सं जुड़ल हजारो लोकक सामने गंभीर आर्थिक संकट सं होयत। घटैत दाम आ विदेशी मांगक कमी पूरा क्षेत्रक आर्थिक गतिविधि प्रभावित कए रहल अछि।
बाजार विविधीकरणक आवश्यकता
दरभंगा मखान अनुसंधान केंद्रक विज्ञानी मनोज कुमार कहने छथि जे पश्चिम एशियाक युद्धक असरि मखान व्यवसाय पर स्वाभाविक अछि, कारण ई वैश्विक व्यापार पर प्रभाव दैत अछि। ओ कहने छथि जे एहि समय निर्यातक लेल बाजार विविधीकरण जरूरी अछि। केवल अमेरिका आ पश्चिम एशियाई देश पर निर्भर नहि रहि, बल्कि यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया आ अन्य उभरैत बाजार मे नव अवसर ताकल जाए।
भारतक वैश्विक बढ़त अछि कायम
मनोज कुमार आगू कहने छथि जे मखान उत्पादन मे भारतक वैश्विक बढ़त कायम अछि आ एहि क्षेत्र मे दोसर देश आसानी सं चुनौती नहि दए सकैत अछि। वैश्विक आपूर्तिक लगभग 90 प्रतिशत मखान भारत आ विशेष रूप सं मिथिला सं अबैत अछि, जाहि सं ई क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनल अछि।



