शाहपुर मे पोखरि-पार्क निर्माणक 2.90 करोड़ टाकाक योजना कें 24 भाग मे बांटबाक आरोप
- जांच मे अनियमितता आयल सामने, योजनास्थल पर नहि भेटल शिलापट्ट
सहरसा, समदिया
नगर परिषद सं नगर निगम बनल सहरसा मे विकास योजनाक कार्यान्वयन मे कथित अनियमितताक मामिला सामने आयल अछि। नगर निगम क्षेत्र मे शामिल शाहपुर पंचायत मे पोखर आ पार्क निर्माण सं जुड़ल योजनाक अभिलेखीय जांच आ स्थल निरीक्षणक क्रम मे कतेको कमी उजागर होयबाक बात कहल गेल अछि। जांच प्रतिवेदनक अनुसार, एके प्रकृति आ कार्यक्षेत्र सं जुड़ल निर्माण काज कें 24 अलग-अलग योजना मे बांटल गेल, जाहि सभक कुल राशि 2 करोड़ 90 लाख 35 हजार 505 टाका बताओल गेल अछि।
प्रत्येक योजनाक राशि 15 लाख टाका सं कम रखबाक आरोप
जांच मे सामने आयल तथ्यक अनुसार, शाहपुर मे पोखर आ पार्क निर्माणक एकटा समेकित काज कें अलग-अलग 24 योजना मे बांटि देल गेल आ प्रत्येक योजनाक राशि 15 लाख टाका सं कम राखल गेल। प्रतिवेदन मे एहि पर सवाल उठबैत आशंका व्यक्त कयल गेल अछि जे योजना कें छोट-छोट भाग मे विभाजित करबाक उद्देश्य निर्धारित प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया सं बचब आ सीमित अथवा पसंदीदा अभिकर्ता सभ कें काज देबाक परिस्थिति बनायब भए सकैत अछि। प्रतिवेदन मे एहि व्यवस्था कें विभागीय निर्देश आ योजना कें कृत्रिम रूप सं विभाजित नहि करबाक नियमक प्रतिकूल बताओल गेल अछि। हालांकि, एहि मामिला मे केकरो संलिप्तता अथवा दोष कें आखरी रूप सं प्रमाणित करबाक लेल नियमानुसार जांच आ साक्ष्यक परीक्षण आवश्यक होयत।
स्थल पर नहि भेटल योजनाक शिलापट्ट
स्थल निरीक्षणक दौरान कोनो योजनास्थल पर शिलापट्ट नहि भेटबाक बात सेहो जांच प्रतिवेदन मे दर्ज कयल गेल अछि। निर्माण काजक पारदर्शिता आ निगरानी व्यवस्थाक दृष्टि सं एकरा गंभीर प्रश्न मानल गेल अछि। प्रतिवेदन मे संबंधित अधिकारी आ अन्य जिम्मेदार लोकक विरुद्ध विभागीय आ कानूनी कारबाइ करबाक संगहि सरकारी राशिक संभावित क्षतिक वसूली सुनिश्चित करबाक मांग कयल गेल अछि।
मुख्यमंत्रीक दौरा सं जुड़ल अछि शाहपुरक विकास काज
उल्लेखनीय अछि जे सत्तरकटैया प्रखंडक अंतर्गत रहल शाहपुर पंचायत कें बाद मे नगर निगम क्षेत्र मे शामिल कयल गेल। मुख्यमंत्री नीतीश कुमारक सहरसा दौरा क’ दौरान शाहपुर स्थित बाढ़ि आश्रयस्थलक जीर्णोद्धार कयल गेल छल। ओतहि जीविकाक सिलाइ केंद्र सेहो खोलल गेल छल। मुख्यमंत्रीक आगमन कें लए शाहपुर मे पोखर, पार्क सहित अन्य विकास काज सेहो कराओल गेल छल। फिलहाल, जांच प्रतिवेदन मे दर्ज आरोपक आधार पर एहि मामिला कें गंभीर मानल जा रहल अछि। हालांकि, जाधरि सक्षम प्राधिकारक जांच मे आरोप प्रमाणित नहि होइत अछि, ताधरि कोनो अधिकारी अथवा संबंधित व्यक्ति कें दोषी ठहरायब उचित नहि होयत। आब एहि मामिला मे आगू होमयवला कारबाइ आ जांचक निष्कर्ष पर सभक नजरि लागल अछि।