बरदाहा दुर्गा सह काली मंदिर मे वैष्णव पद्धति सं होइत अछि पूजा
सिकटी/अररिया, प्रभु झा
अररिया जिलाक सिकटी प्रखंडक बरदाहा बाजार स्थित सार्वजनिक काली सह दुर्गा मंदिर मे अंग्रेजी शासनकाल सं शारदीय नवरात्र आ काली पूजाक अवसर पर मां जगतजननी भगवतीक पूजा एक्के परिसर मे भव्य प्रतिमा स्थापित कए पूरा विधि-विधान आ श्रद्धाक संग वैष्णव पद्धति सं कयल जाइत अछि। सार्वजनिक सहयोग सं होमयवला एहि पूजाक विशेषता भव्य पंडाल, आकर्षक सजावट आ विशाल मेला अछि। मंदिर परिसर सामाजिक सद्भाव आ आपसी सौहार्दक सेहो उदाहरण प्रस्तुत करैत अछि। बरदाहा मंदिर परिसर मे लगयवला मेला मे दुनू समुदायका छोट-पैघ कारोबारी अपन दोकान लगबैत छथि। सालभरि मंदिरक आगू बाजार लगैत अछि, मुदा दुर्गा पूजा आ काली पूजाक समय कारोबारी स्वेच्छा सं अपन दोकान हटा लैत छथि। पूजा समितिक दिस सं निर्धारित जगह पर फेर ओ सभ दोकान लगबैत छथि, जे पूरा परिसर कें आकर्षक मेला के रूप दैत अछि। एहि क्षेत्र मे ताजियाक जुलूस मंदिरक आगू सं गुजरैत अछि, तखने प्रतिमा विसर्जनक शोभायात्रा मस्जिदक आगू सं निकलैत अछि। ई परंपरा आपसी सद्भावक मिसाल अछि।
शुद्ध मोन सं मंगला पर पूरा होइत अछि कबूला
मंदिरक पुजारी सत्यनारायण ठाकुर कहलनि जे मायक दरबार मे सच्चा मन सं मंगबाक पर भक्तसभक मन्नत पूरा होइत अछि। महाअष्टमीक राति भक्ति जागरणक आयोजन कयल जाइत अछि। महाअष्टमीक दिन नारियल फोड़ि पूजा करबाक परंपरा अछि। एहि दिन सैकड़ो कुमारी कन्या कें भोजन कराओल जाइत अछि। पुजारीक अनुसार, महाअष्टमीक विशेष पूजा मे शामिल भए मायक आगू माथ टेकयवला श्रद्धालु अपन मनोकामना पूर होयबाक कामना करैत छथि। सत्यनारायण ठाकुर बतौलनि जे मंदिरक स्थापना काल सं हुनकर पिता स्वर्गीय युगल किशोर पंडित पूजा करैत छलाह। हुनकर निधनक बाद सं ओ स्वयं मंदिर मे पूजा-अर्चना करैत आबि रहल छथि।
सैकड़ो बरख पुरान अछि मंदिरक इतिहास
स्थानीय बुजुर्ग विश्वनाथ मंडल आ मोतीलाल साह मंदिरक इतिहासक संबंध मे बतौलनि जे सैकड़ो बरख पहिने अंग्रेजी शासनकाल मे तत्कालीन महंत श्याम सुंदर भारती मंदिरक निर्माण करौने छलाह। ओहि समय कच्चा घर मे देवी मायक पूजा होइत छल। बरख 1990 मे मंदिरक जीर्णोद्धार शुरू भेल। मंदिर निर्माण समिति आ पूजा समितिक निरंतर प्रयास सं आइ मंदिर भव्य रूप लए चुकल अछि। मंदिरक सौंदर्यीकरणक काज लगातार जारी अछि। मंदिरक वास्तुकला सामान्य नक्शा पर आधारित अछि। सुरक्षा लेल दू स्तर पर लोहेक गेट लगाओल गेल अछि। बुजुर्गसभक अनुसार, पहिने मंदिर मे बलि देबाक परंपरा प्रमुख छल, मुदा आब देवी मायक पूजा वैष्णव विधि-विधान सं होइत अछि। एक्के मंदिर मे काली पूजा आ दुर्गा पूजा दुनू होइत अछि। दुर्गा प्रतिमाक विसर्जन दशमीक दिन कयल जाइत अछि, जखन कि काली प्रतिमा सालभरि मंदिर मे रहैत अछि।
नेपाल सं सेहो अबैत छथि श्रद्धालु
पूजा समितिक दिस सं भक्ति जागरण आ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कयल जाइत अछि। आयोजन समिति मे अध्यक्ष मनोज कुमार साह, सचिव रविशंकर पटेवा, कोषाध्यक्ष सुधाकर मंडल सहित पप्पू स्वर्णकार, बीरेंद्र मंडल, सुशील स्वराज, सुदामा भगत, जयंत कुमार, विनोद मोदी, संजय साह आ ललित सिंह सहित कतेको युवा सक्रिय भूमिका निभबैत छथि। भव्य पूजा, आकर्षक सजावट आ विशाल मेला बरदाहा काली सह दुर्गा मंदिरक प्रमुख विशेषता अछि। मंदिर मे स्थानीय श्रद्धालुसभक संग पड़ोसी देश नेपाल सं सेहो लोक आबि मायक दरबार मे माथ टेकैत छथि। एहि कारण ई मंदिर क्षेत्रक प्रमुख आस्था केंद्र बनल अछि।