अपरंपार अछि 250 वर्ष पुरान जफरा भगवतीक महिमा
- नवरात्रि मे नेपालो सं अबैत छथि पैघ संख्या मे श्रद्धालु
मधुबनी, समदिया
मिथिलालक प्रसिद्ध सिद्धपीठ सभ मे जफरा दुर्गा मंदिरक विशिष्ट स्थान अछि। एहि ठाम नवरात्रिक अवसर पर भगवतीक दर्शन-पूजन लेल श्रद्धालु सभक भारी भीड़ जुटैत अछि। एहि सिद्धपीठ मे छिन्नमस्तिका भगवती भैरवक संग विराजमान छथि। श्रद्धालु सभक मान्यता अछि जे जे भक्त शुद्ध मोन सं भगवतीक आराधना करैत छथि, हुनकर मनोकामना अवश्य पूर्ण होइत अछि। नवरात्रि मे मधुबनी जिलाक अतिरिक्त आन-आन जिला आ नेपालो सं पैघ संख्या मे श्रद्धालु दर्शन-पूजन लेल एतय पहुंचैत छथि। मंदिर मे सालोभर भक्त सभक आवागमन लागल रहैत अछि।
स्थानीय जनश्रुतिक अनुसार, करीब ढाई सय वर्ष पूर्व सिमरी गामक पंडित कमलनाथ मिश्र कें स्वप्न मे भगवती जफरा गामक घनगर जंगल मे अपन उपस्थिति रहबाक संकेत देने रहथि। भोर भेलापर पंडित कमलनाथ मिश्र ओहि स्थान पर पहुंचलाह तं हुनका भगवतीक मस्तक आ भैरवक दर्शन भेलनि। तकर बाद ओ खुनाइ कए भगवतीक प्रतिमा अपन संग लए जेबाक प्रयास कयलनि। मुदा लोकमान्यता अछि जे जतेक खुनाइ कयल जाइत छल, भगवती ओतेके नीचा चलि जाइत छलीह। एहि अद्भुत घटनाक बाद प्रतिमा कें ओतय सं लए जेबाक प्रयास छोड़ि देल गेल।
किछु समय बाद जफरा गामक भगत लक्षण कामति कें सेहो स्वप्न भेलनि। स्वप्न मे भगवती संकेत देलथिन जे ओ एहि स्थान पर रहय चाहैत छथि। तकर बाद ओतहि भगवतीक पूजा-अर्चना शुरू भए गेल। बाद मे दरभंगा महाराजक दिस सं एहि स्थान पर मंदिरक निर्माण कराओल गेल। वर्तमान मे पंडित कमलनाथ मिश्रक वंशज रतीश मिश्र एहि मंदिरक पुजारी छथि।
पहिने एहि मंदिर मे बलि देबाक परंपरा छल। मुदा सामाजिक बदलावक कारण करीब 50 वर्ष पूर्व एहि परंपरा कें बंद कए देल गेल। आब भगवती कें लड्डूक भोग लगाओल जाइत अछि आ श्रद्धालु सभ श्रद्धा-भक्तिपूर्वक हुनकर आराधना करैत छथि।
पौराणिक आख्यानक अनुसार, यज्ञस्थल पर जेबाक प्रसंग मे महादेव आ सतीक बीच भेल घटनाक्रमक बाद भगवान विष्णु अपन चक्र सं सतीक शरीर कें खंडित कयने छलाह। लोकमान्यता अछि जे सतीक मस्तक जफराक घनगर जंगल मे खसल छल, जखन कि हुनकर धड़ बेनीपट्टीक उच्चैठ स्थान पर खसल छल। उच्चैठ स्थान सेहो मिथिलाक प्रसिद्ध सिद्धपीठ सभ मे गिनल जाइत अछि।
मंदिरक पुजारी रतीश मिश्र कहैत छथि जे एहि सिद्धपीठ मे दूर-दूर सं आबयबला श्रद्धालु सभ अटूट आस्था आ विश्वासक संग भगवतीक पूजा-अर्चना करैत छथि। भक्त सभक दृढ़ विश्वास अछि जे भगवतीक दरबार मे शुद्ध मोन सं प्रार्थना करयबला केओ निराश भए कए वापस नहि लौटैत छथि। एहि विश्वासक कारण जफरा सिद्धपीठ नवरात्रि मे मिथिला आ नेपालक श्रद्धालु सभक लेल आस्थाक प्रमुख केंद्र बनल रहैत अछि।