हाइ रे विकास! झंझारपुर मे 991 छात्र टेंटक नीचा पढ़बा लेल विवश, केजरीवाल स्कूलक भवन मे केंद्रीय विद्यालय
झंझारपुर सं अमरदेवक रिपोर्ट
मिथिलाक अत्यंत प्रतिष्ठित आ गौरवशाली शिक्षण संस्थान केजरीवाल प्लस टू उच्च विद्यालय, झंझारपुर मे एहि समय शिक्षा-व्यवस्थाक बदहाली चरम पर पहुंचि गेल अछि। सरकार द्वारा एहि विद्यालयक भवन मे केंद्रीय विद्यालय खोलि देल गेलाक बाद विद्यालय मे जगहक भारी कमी भए गेल अछि। स्थिति एहन अछि जे एहि ऐतिहासिक विद्यालयक मूल 991 छात्र-छात्रा विद्यालय परिसर मे टेंटक नीचा तपैत रौद आ बरसैत पानि बीच पढ़ाइ करबा लेल आ परीक्षा देबा लेल विवश छथि।
विद्यालय मे वर्तमान मे कुल 991 विद्यार्थी नामांकित छथि। प्रधानाध्यापक विनय कुमार झा बतौलनि जे पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहि रहबाक कारण छात्र-छात्रा कें दू पाली मे पढ़ाओल जा रहल अछि। भोरक पाली मे नवम आ दशम वर्गक पढ़ाइ होइत अछि, जखन कि मध्याह्न 12 बजे सं सांझ 5 बजे धरि एकादश आ द्वादश वर्गक कक्षा संचालित होइत अछि। परीक्षा काल मे स्थिति आओर कठिन भए जाइत अछि। खुजल मैदान मे बेंच-डेस्क लगा कए टेंटक सहारा मे छात्र-छात्राक परीक्षा लेल जाइत अछि। तपैत रौद हो अथवा बरसैत पानि, एहि प्रतिकूल परिस्थिति मे बच्चा कें परीक्षा देबय पड़ैत अछि।
प्रशासनक दिस सं विद्यालय लेल वैकल्पिक कक्ष उपलब्ध करेबाक आश्वासन देल गेल छल। मुदा आश्वासनक बादो एखन धरि कोनो ठोस व्यवस्था नहि भए सकल अछि। विद्यालय परिवार आ स्थानीय लोकक बीच एहि बात कें लए कए चिंता बढ़ि रहल अछि जे भवनक अभाव आ असुविधाक सीधा असरि छात्र-छात्राक पढ़ाइ पर पड़ि रहल अछि। एक दिस विद्यालयक प्रधानाध्यापक विभागीय स्तर पर अपन प्रयास लेल प्रशंसा पाबि सकैत छथि, मुदा दोसर दिस विद्यालयक मूल बच्चाक शिक्षा पर एहि अवस्थाक प्रतिकूल प्रभाव पड़बाक आशंका अछि।
एहि स्कूलक रहल अछि गौरवशाली इतिहास
केजरीवाल विद्यालयक अपन एकटा गौरवशाली इतिहास रहल अछि। एहि संस्थान सं पढ़ल कतेको छात्र आइ देश आ विदेशक विभिन्न क्षेत्र मे महत्वपूर्ण पद पर अपन सेवा दए रहल छथि। एहि कारण ई विद्यालय मात्र झंझारपुरक नहि, बल्कि समूचा मिथिलाक लेल शिक्षाक एकटा महत्वपूर्ण केंद्र मानल जाइत रहल अछि। एहन गौरवशाली संस्थानक छात्र-छात्रा कें अपनहि परिसर मे टेंटक नीचा पढ़ाइ आ परीक्षा देबाक स्थिति मे पहुंचा देब निश्चित रूप सं गंभीर प्रश्न ठाढ़ करैत अछि।
शिक्षा व्यवस्था पर उठि रहल अछि सवाल
शिक्षाविद् लोकनि कहैत छथि जे अंग्रेजी शासनकाल मे कारी आ गोरा अर्थात हिंदुस्तानी आ अंग्रेज लोक लेल अलग-अलग शिक्षा-व्यवस्थाक चलन छल। स्वतंत्र भारत मे सेहो धीरे-धीरे एहन स्थिति बनि गेल अछि, जतय आम लोकक बच्चा सरकारी विद्यालय मे पढ़ैत अछि, जखन कि राजनेता, पैघ अधिकारी आ पूंजीपति वर्गक बच्चा निजी अथवा स्वायत्त विद्यालय मे शिक्षा ग्रहण करैत अछि। केजरीवाल विद्यालयक वर्तमान स्थिति एहि दोहरी शिक्षा-व्यवस्थाक एकटा टटका उदाहरणक रूप मे देखल जा रहल अछि।
स्थानीय लोकक आरोप अछि जे सरकार अपन शक्ति आ अधिकारक उपयोग करैत मूल विद्यालयक छात्र-छात्रा कें टेंटक नीचा पढ़बाक स्थिति मे छोड़ि देलक, जखन कि नव स्थापित केंद्रीय विद्यालयक छात्र-छात्रा लेल पक्का भवन मे पढ़ाइक व्यवस्था कएल गेल। एकहि परिसर मे दू तरहक व्यवस्था देखबा मे अबैत अछि। एक दिस नव स्थापित केंद्रीय विद्यालय लेल अपेक्षाकृत कम समय मे भवन आ सुविधा उपलब्ध कराओल गेल, दोसर दिस दशक सं क्षेत्र मे शिक्षाक अलख जगबैत आबि रहल मूल सरकारी विद्यालयक लेल पर्याप्त कक्ष, भवन आ अन्य आवश्यक सुविधाक कोनो ठोस व्यवस्था एखन धरि नहि भए सकल अछि।
स्थानीय लोक मे अछि आक्रोश
स्थानीय लोकक कहब अछि जे जं सरकार नव संस्थान लेल शीघ्र व्यवस्था कए सकैत अछि, तं दशक सं चलि रहल एहि गौरवशाली विद्यालयक छात्र-छात्रा लेल वैकल्पिक कक्ष, अतिरिक्त भवन आ आवश्यक आधारभूत सुविधा उपलब्ध करेबा मे विलंब किएक भए रहल अछि। लोकक प्रश्न अछि जे मूल विद्यालयक समस्या समाधान लेल सरकारक लग स्पष्ट योजना अछि वा नहि, यदि अछि तं ओकरा लागू करबाक समय-सीमा की अछि।
एहि दोहरा व्यवस्था कें लए कए स्थानीय लोक मे भारी आक्रोश अछि। लोक कहैत छथि जे सामंती शासन-व्यवस्था मे समाजक अलग-अलग वर्ग लेल अलग-अलग सुविधा आ व्यवस्था होइत छल। ओहि प्रकारक विभाजनक छाया आधुनिक शिक्षा-व्यवस्था मे सेहो देखाइ पड़ि रहल अछि। गरीब आ सामान्य परिवारक बच्चा लेल एक प्रकारक विद्यालय आ संपन्न वर्गक बच्चा लेल दोसर प्रकारक विद्यालयक व्यवस्था बनैत जा रहल अछि। एहि कारण स्थानीय स्तर पर ई चर्चा सेहो जोर पकड़ि रहल अछि जे देश मे शिक्षा आ सुविधा लेल गरीब आ संपन्न वर्गक बीच दूरी कम करबाक बदला बढ़ैत जा रहल अछि।
सरकार गंभीरता पूर्वक करय विचार
लोकक स्पष्ट मानब अछि जे शिक्षा मे समानता लोकतांत्रिक समाजक मूल आधार अछि। एकहि परिसर मे एक वर्गक बच्चा पक्का भवन मे आ दोसर वर्गक बच्चा टेंटक नीचा पढ़ए अथवा परीक्षा देअए, तं एहि स्थिति पर सरकार कें गंभीरतापूर्वक विचार करबाक आवश्यकता अछि। केजरीवाल प्लस टू उच्च विद्यालयक गौरवशाली इतिहास आ हजारो छात्रक भविष्य कें देखैत तत्काल वैकल्पिक कक्ष, स्थायी भवन आ आवश्यक आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराओल जाए, तखने एहि संस्थानक पुरान प्रतिष्ठा आ शैक्षणिक वातावरण कें बचाओल जा सकत। नहि तं एहि ऐतिहासिक विद्यालय मे माकूल आ गुणवत्तापूर्ण शिक्षाक कल्पना करब कठिन भए सकैत अछि।