मिथिला मे श्रद्धापूर्वक मनाओल गेल कुशी अमावस्या
- कुशोत्पाटिनी पर उखाड़ल गेल कुश
झंझारपुर, समदिया
मिथिलाक समृद्ध धार्मिक परंपराक अनुसार शुक्रदिन कुशी अमावस्याक पर्व श्रद्धा आ उत्साहक संग मनाओल गेल। एकरा कुशोत्पाटिनी अमावस्या आ कुशग्रहणी अमावस्याक नाम सं सेहो जानल जाइत अछि। शुक्रदिन भोरहि सं गाम-समाजक लोक, श्रद्धालु आ पुरोहित सभ खेतक मेड़, नदी-पोखरि आ पवित्र स्थानक कात पहुंचि विधि-विधानपूर्वक कुश उखाड़ि संग्रह केलनि। मान्यता अछि जे भाद्रपद कृष्ण अमावस्याक दिन धरती सं उत्पन्न होमयवला कुश विशेष रूप सं पवित्र आ अभिमंत्रित होइत अछि आ बरख भरि नष्ट नहि होइत अछि। एहि कारण मिथिला मे एहि कुशक विशेष धार्मिक महत्व अछि। एहि एक दिन संग्रह कएल कुश सं बरख भरिक धार्मिक, मांगलिक काज, देवपूजन, जप-तप, श्राद्ध आ मातृ-पितृ तर्पण सहित विभिन्न अनुष्ठान संपन्न कएल जाइत अछि। कुशक बिना कोनो धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहि मानल जाइत अछि। परंपराक अनुसार कुश संग्रह कएलाक बाद सर्वप्रथम एहि कुश सं मातृ-पितृक लेल तर्पण कएल जाइत अछि। तकर बाद कुश कें पवित्र स्थान पर बरख भरिक लेल सुरक्षित राखि देल जाइत अछि। स्थानीय विद्वान सभक अनुसार कुशी अमावस्याक दिन आनल गेल कुश अत्यंत पुण्यदायी मानल जाइत अछि। एहि अवसर पर ग्रामीण क्षेत्र सभ मे सेहो लोक अपन-अपन घर पर कुश आनलनि आ पितरक निमित्त तर्पण, पूजापाठ करैत परंपराक निर्वाह केलनि। एहि दौरान खेतक मेड़, नदी-तालाबक कात आ अन्य पवित्र स्थान सभ पर कुश संग्रह करबाक लेल श्रद्धालु सभक आवाजाही देखल गेल।