अबला कें सबल बनौनिहार छथि रहिकेश्वरी अष्टभुजी दुर्गा, दूर-दूर धरि पसरल अछि महिमा
- अबला कें सबला बनबैत छथि माता रहिकेश्वरी
रहिका, समदिया
मधुबनी जिलाक प्रखंड मुख्यालय रहिका स्थित माता रहिकेश्वरी दुर्गा देवीक ख्याति दूर-दूर धरि पसरल अछि। एहि मंदिरक इतिहास अत्यंत प्राचीन अछि। मान्यता अछि जे माता रहिकेश्वरी अबला कें सबला बनबैत छथि आ अपन शरण मे आयल भक्त सभक मनोरथ पूर्ण करैत छथि। सिंह पर सवार माता दुर्गा एतय महिषासुर मर्दिनीक स्वरूप मे विराजमान छथि। हुनकर आठ भुजा अछि। मंदिर मे स्थापित माताक प्रतिमाक स्वर्णमय स्वरूप अत्यंत सुंदर आ आकर्षक अछि।
खुदाइक क्रम मे भेटल छल अष्टधातुक प्रतिमा
स्थानीय मान्यताक अनुसार, मंदिरक समीप रहनिहार बलियासे मूलक एकटा ब्राह्मण परिवारक सदस्य कें माता दुर्गा स्वप्न मे दर्शन देने छलीह। कहल जाइत अछि जे माता हुनका अपन निवास स्थानक जानकारी दैत कहलनि जे हुनकर प्रतिमा धरतीक नीचां दबायल अछि। एहि स्वप्नक आधार पर ओहि स्थान पर खुदाइ कराओल गेल, जाहि मे माता दुर्गाक अष्टधातुक प्रतिमा प्राप्त भेल।
खुदाइक क्रम मे बनल इनार आइयो मंदिर परिसर मे उपलब्ध अछि। ई इनार मंदिरक प्राचीन इतिहासक एकटा महत्वपूर्ण निशानी मानल जाइत अछि। सिंह पर सवार अष्टभुजी माता महिषासुर मर्दिनीक मुद्रा मे ऐतिहासिक रूप सं विराजमान छथि। एतय जगदंबाक एहि स्वरूपक पूजा नवदुर्गाक रूप मे सेहो कयल जाइत अछि।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलि रहल अछि पूजा-परंपरा
मंदिरक पुरोहित परंपराक निर्वहन करैत वर्तमान पुरोहित पंडित धीरेंद्र मिश्र बतबैत छथि जे माता रहिकेश्वरी हुनकर कुलदेवी छथि। हुनकर कहब अछि जे माताक स्वप्न मे देल गेल संकेतक अनुसार, एतय पूजेगरी करयबला वंशक पूर्वज कें रहिका सं ठीक पश्चिम अवस्थित अरेर गाम सं अनने रहथि आ एतय बसा देल गेल छल। तखनहि सं एहि परंपराक निर्वहन पीढ़ी-दर-पीढ़ी पारंपरिक रूप सं होइत आबि रहल अछि।
पंडित विनोद झा कहैत छथि जे रहिकेश्वरी मंदिरक पूजा-पद्धति अन्य मंदिर सभ सं भिन्न अछि। हुनकर अनुसार, एहन पूजा-पद्धति आन कतहु देखय लेल नहि भेटैत अछि। एहि विशिष्ट परंपराक कारणें मंदिरक धार्मिक महत्व बढ़ल अछि।
एहि पंचकोसीक आस्थाक केंद्र छथि माता
माता रहिकेश्वरी पूजा समितिक वर्तमान अध्यक्ष आ मिथिला आंदोलन सं जुड़ल मनोज झा बतबैत छथि जे एतय विराजमान माता दुर्गा अबला कें सबल बनौनिहार छथि। हुनकर कहब अछि जे पूर्व समय मे रहिकाक लगपास लगभग पांच कोसक क्षेत्र मे कतहु दुर्गापूजाक आयोजन नहि होइत छल। ओहि समय सं आइ धरि माता रहिकेश्वरी क्षेत्रक लोकक आस्थाक प्रमुख केंद्र बनल छथि। माताक स्वर्णमय स्वरूप भक्त सभ कें आकर्षित करैत अछि। लोक दूर-दूर सं अपन कबूला लए श्रद्धा आ भक्तिभावक संग मंदिर पहुंचैत छथि। स्थानीय लोकक गहींर आस्था अछि जे अष्टभुजी माता अपन भक्त सभ कें कहियो निराश नहि करैत छथि। भक्त सभक मनोकामना पूर्ण करयबाली जगदंबाक रूप मे हुनकर प्रसिद्धि अछि।
मंदिर मे सामान्य दिनो श्रद्धालु सभक अबैत-जाइत रहबाक क्रम बनल रहैत अछि। मुदा आश्विन मासक दुर्गापूजाक अवसर पर एतय विशेष चहल-पहल रहैत अछि। पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस मे डूबल रहैत अछि। दूर-दराजक गाम सभ सं श्रद्धालु माता रहिकेश्वरीक दर्शन आ पूजा-अर्चना करबाक लेल पहुंचैत छथि। रहिकेश्वरी अष्टभुजी दुर्गा मंदिर मात्र धार्मिक आस्थाक केंद्र नहि, बल्कि क्षेत्रक प्राचीन परंपरा, लोकविश्वास आ सांस्कृतिक विरासतक प्रतीक सेहो अछि। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलि रहल पूजा-पद्धति आ माताक प्रति लोकक अटूट श्रद्धा एहि मंदिर कें विशिष्ट पहिचान प्रदान करैत अछि।