जननायक कर्पूरी ठाकुर : जे देशक आजादीक संगहि समाजक स्वतंत्रता लेल केलनि संघर्ष
- ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ मे पकड़ल गेलाह कर्पूरी, जेल मे बितौलनि 26 मास
पटना, समदिया
समस्तीपुरक पितौंझिया गाम। एकटा साधारण परिवारक युवक अपन भविष्यक सपना देखैत छल। नाम छल – कर्पूरी ठाकुर। पढ़बाक तीव्र इच्छा छल, आगू बढ़बाक आकांक्षा छल। मुदा ओहि समय देशक गुलामीक पीड़ा हुनकर व्यक्तिगत सपना सं पैघ भए गेल छल। कर्पूरीक मोन छात्र जीवनहि सं राष्ट्रीय आंदोलन आ समाजवादी विचारधाराक दिस आकृष्ट भए गेल छल। 1938 मे ओइनी मे आयोजित प्रांतीय किसान सम्मेलन हुनकर राजनीतिक चेतनाक विकास मे महत्वपूर्ण पड़ाव बनल। सम्मेलन मे आचार्य नरेंद्र देव सेहो उपस्थित छलाह। युवा कर्पूरीक भीतरक वक्ता आ कार्यकर्ताक प्रतिभा हुनकर ध्यान आकर्षित कएलक। धीरे-धीरे कर्पूरी मात्र पढ़निहार छात्र नहि रहलाह, बल्कि समाज आ देशक प्रश्न सभ पर सोचनिहार युवक बनि गेलाह।
फेर आयल 1942।
महात्मा गांधी भारत छोड़ो केर आह्वान कएलनि। अंग्रेजी शासनक विरुद्ध देश निर्णायक संघर्ष मे उतरि गेल। नेता सभ गिरफ्तार भए गेलाह, मुदा आंदोलनक आगि गाम-गाम धरि पसरि गेल। कर्पूरी तखन छात्र छलाह। मुदा हुनका बुझना गेलनि जे एहन समय मे मात्र किताबक पन्ना उनटैत रहब पर्याप्त नहि अछि। देशक भविष्यक प्रश्न हुनका कक्षा-कक्ष सं बाहर बजा रहल छल। ओ पढ़ाइ छोड़ि देलनि आ भारत छोड़ो आंदोलन मे कूदि पड़लाह।
आंदोलनक ओ समय आसान नहि छल। अंग्रेज सरकार आंदोलनकारी सभक पाछां पड़ल छल। कर्पूरी सेहो गिरफ्तार भेलाह। स्वतंत्रता आंदोलनक दौरान हुनका लगभग 26 मास जेल मे रहए पड़लनि। जेलक दीवार हुनकर शरीर कें रोकि सकल, मुदा विचार कें नहि।
जेल मे बिताओल समय हुनकर जीवनक दिशा आरो स्पष्ट कएलक। समाजवाद, सामाजिक समानता आ वंचित लोकक अधिकारक प्रश्न हुनकर चिंतनक केंद्र मे आबि गेल। आजादी हुनकर लेल मात्र अंग्रेजक शासन सं मुक्ति नहि छल, आजादीक अर्थ छल – एहन समाज, जतय गरीबक आवाज सुनल जाए, किसान-मजदूरक सम्मान हो आ साधारण आदमी सेहो अपन अधिकारक संग जी सकय।
1947 मे देश स्वतंत्र भेल। मुदा कर्पूरीक संघर्ष समाप्त नहि भेल। अंग्रेज चलि गेलाह, मुदा समाज मे व्याप्त असमानता, गरीबी आ भेदभावक प्रश्न हुनकर सामने ठाढ़ छल।
जे युवक देश कें आजाद करबाक लेल पढ़ाइ छोड़ि देने छल, वएह युवकक राजनीतिक यात्रा आगू चलि सामाजिक बराबरीक संघर्ष मे बदलि गेल। कर्पूरी ठाकुरक स्वतंत्रता-संग्रामक असल अर्थ शायद एतबे छल – देशक आजादीक सपना देखनिहार युवक बाद मे समाजक आजादीक सेहो लड़ाका बनि गेल।