ब्रिक्सक भोज मे हिमालयक बाढ़ि किएक नहि? नेपालक आपदा पर उठल पैघ सवाल
सच्चिदानंद सच्चू
दिल्ली मे 12 आ 13 सितंबर कें 18म ब्रिक्स शिखर सम्मेलन संपन्न भेल। दुनियां भरिक नजरि एहि सम्मेलन पर छल। भारतक अध्यक्षता मे भेल एहि सम्मेलनक विषय छल – लचीलापन, नवाचार, सहयोग आ स्थायित्वक माध्यम सं भविष्यक निर्माण। ब्रिक्सक दिल्ली घोषणापत्र मे जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, आपदा घटेबाक उपाय आ पूर्व चेतावनी प्रणाली सन महत्वपूर्ण मुद्दा पर सेहो विस्तार सं बात भेल।
मुदा एहि सबक बीच एकटा प्रश्न हमरा सभक मोन मे उठैत अछि – हिमालयक कोरा मे हालहि मे घटल नेपालक महाविनाशकारी बाढ़ि की एहि विमर्शक हिस्सा नहि बनबाक चाही छल? ई प्रश्न नेपालक लेल मात्र नहि अछि। ई प्रश्न भारतक लेल अछि, चीनक लेल अछि आ खास कए हिमालयक दक्षिणी ढलान पर बसल करोड़ो लोकक लेल अछि।
नेपाल ब्रिक्सक सदस्य नहि अछि। ई बात सत्य अछि। मुदा की अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोनो संकट पर चर्चा करबाक लेल ओकर पीड़ित देशक सदस्य भेनाइ अनिवार्य अछि? जं एहन होय तं जलवायु परिवर्तन, समुद्री आपदा, भूकंप, महामारी आ सीमापार पर्यावरणीय संकट पर वैश्विक सहयोगक अर्थे की रहि जायत?
नेपालक एहि आपदा मे हजारो लोकक जीवन प्रभावित भेल अछि। सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र मे ग्लेशियर, अत्यधिक बरखा आ पहाड़ी भूभाग सं जुड़ल आपदा कतेक तेजी सं भयावह रूप धारण कए सकैत अछि, ई घटना फेर एक बेर देखौलक। हालिया रिपोर्ट अनुसार नेपालक बाढ़ि मे भारी जन-धनक क्षति भेल अछि आ कतेको बस्ती माटि-पाथरक ढेर मे बदलि गेल अछि।
आ एहि ठाम प्रश्न आरो पैघ भए जाइत अछि।
नेपाल आ भारतक सीमा राजनीतिक सीमा भए सकैत अछि, मुदा नदीक पानि सीमा नहि चिन्हैत अछि। पहाड़ पर भेल बरखा, हिमपात, ग्लेशियरक परिवर्तन वा अनचोके आयल बाढ़िक असरि नदीक धार पकड़ि भारत धरि पहुंचैत अछि। उत्तर बिहार आ मिथिला एहि प्राकृतिक प्रक्रियाक प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र अछि। कोसी, कमला, बागमती, गंडक सहित कतेको नदीक जीवन हिमालय सं जुड़ल अछि। नेपालक पहाड़ मे जे घटैत अछि, ओकर प्रतिध्वनि कखनो-कखनो मिथिलाक खेत, घर आ सड़क धरि सुनाइ पड़ैत अछि।
तखन ब्रिक्सक मंच पर नेपालक आपदा पर चर्चा भेनाइ असंगत कोना भए सकैत छल?
विशेष रूप सं तखन, जखन भारत आ चीन दुनू ब्रिक्सक महत्वपूर्ण सदस्य छथि। दुनू देशक विशाल आबादी हिमालयक भूगोल आ ओकर पर्यावरणीय बदलाव सं प्रभावित अछि। भारत-चीनक बीच हिमालय सीमाक प्रश्न राजनीतिक होइत अछि, मुदा हिमालय स्वयं राजनीतिक नहि अछि। ओकर हिमनदक पिघलन, पहाड़क अस्थिरता, नदीक बदलैत प्रवाह आ मौसिमक चरित्रक बदलाव पासपोर्ट नहि मांगैत अछि।
ब्रिक्सक दिल्ली घोषणापत्र मे जलवायु परिवर्तनक सामना करबाक आवश्यकता स्वीकार कएल गेल अछि। विकसित आ विकासशील देशक बीच जलवायु वित्त, अनुकूलन, लॉस एंड डैमेज आ आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली पर सेहो जोर देल गेल अछि। भारतक अध्यक्षता मे जुलाई मे ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण मंत्रिस्तरीय बैठक सेहो भेल छल, जाहि मे आपदा-प्रतिरोधी समाज निर्माण आ पूर्व चेतावनीक क्षेत्र मे सहयोग पर सहमति भेल छल।
तखन सवाल ई नहि जे ब्रिक्स मे जलवायु पर बात भेल कि नहि। बात भेल। सवाल ई अछि जे बातक जमीन पर ओकर सबसं निकटतम आ तात्कालिक उदाहरण सभ कतेक उपस्थित छल?
नेपालक बाढ़ि एकटा अवसर छल – हिमालयक बदलैत स्वरूप पर सामूहिक विमर्श शुरू करबाक। भारत, चीन आ नेपालक वैज्ञानिक, आपदा विशेषज्ञ आ नीति-निर्माता सभ कें एक मंच पर अनबाक। हिमालयी क्षेत्र लेल साझा पूर्व चेतावनी तंत्र, वास्तविक समय मे जल-विज्ञान संबंधी सूचना साझेदारी, ग्लेशियर झीलक निगरानी आ सीमापार आपदा प्रबंधनक व्यवस्था पर चर्चा करबाक।
मिथिलाक लेल ई प्रश्न आर बेसी महत्वपूर्ण अछि।
बाढ़ि मिथिलाक लेल मात्र हर सालक प्राकृतिक घटना नहि अछि। ई अर्थव्यवस्था, कृषि, पलायन, स्वास्थ्य आ सामाजिक जीवनक प्रश्न अछि। जं हिमालयक पर्यावरणीय अस्थिरता बढ़ैत अछि तं ओकर मूल्य सबसं पहिने पहाड़ी आ नदीक कात बसल गरीब समुदाय सभ कें चुकाबय पड़त। एहि मे मिथिला सेहो अछि।
ब्रिक्सक भोज मे परसल गेल व्यंजनक चर्चा मीडिया मे भेल। ई स्वाभाविक अछि – सम्मेलनक मानवीय पक्षक सेहो अपन महत्व अछि। मुदा भोजक टेबुल पर जं दुनिया बदलबाक दाबी कएनिहार नेता बैसल छलाह, तं की ओहि टेबुल पर हिमालयक पिघलैत बर्फ, उफनैत नदी आ नेपालक डूबल बस्ती लेल सेहो किछु स्थान नहि होमक चाही छल?
ई प्रश्न आरोपक लेल नहि अछि। ई आत्ममंथनक लेल अछि।
ब्रिक्स जं स्वयं कें ग्लोबल साउथक आवाज कहैत अछि, जं ओकर लक्ष्य साझा संकट पर सहयोग बढ़ेनाइ अछि, जं ओकर मूल भावना रिज़िलिएंस आ सस्टेनेबिलिटी अछि, तं हिमालयक संकट ओकर एजेंडा सं बाहर कोना रहि सकैत अछि?
नेपाल ब्रिक्सक सदस्य नहि अछि – मुदा हिमालय ब्रिक्सक सदस्यता नहि पूछैत अछि।
आ हिमालयक कोरा मे बसल मिथिला सेहो नहि।
शायद अगिला बेर जखन दुनियां भरिक नेता दिल्ली, बीजिंग वा कोनो अन्य राजधानी मे विकास, व्यापार, जलवायु आ वैश्विक सहयोग पर विमर्श करथि, तखन हुनका सभ कें एक बेर उत्तर बिहारक बाढ़ि प्रभावित घर दिस सेहो देखबाक चाही। कारण नदीक पानि पहिने सीमा पार करैत अछि, आ राजनीति बाद मे ओकर अर्थ बुझैत अछि। हिमालयक संकटक चर्चा हिमालयक देशक सदस्यता पर नहि, बल्कि साझा भविष्य पर होमक चाही।