जनकपुरधाम, समदिया
नेपाली आ मैथिली साहित्यक वरिष्ठ स्रष्टा, भाषाविद् आ शिक्षाविद् डा. राजेन्द्र विमल नहि रहलाह। 79 वर्षक उमेरमे मंगलदिन 11 अगस्त कें जनकपुरधामक प्रादेशिक अस्पताल मे हुनक निधन भेल। सोमदिन राति अचानक स्वास्थ्य खराब भेलाक बाद हुनका अस्पताल मे भर्ती कराओल गेल छल, जतय उपचारक क्रम मे हुनक देहावसान भेल।
डॉ. विमल नेपाल मे मैथिली साहित्यक एकटा महत्वपूर्ण स्तंभ छलाह। हुनक साहित्यिक यात्रा छह दशक सं बेसी नमहर रहल। हुनक पहिल मैथिली कथा ‘विपतिया’ 15 मार्च 1963 केँ ‘मिथिला मिहिर’मे प्रकाशित भेल छल। तकर बाद ओ कथा, कविता, गीत, गजल, नाटक, उपन्यास, आलोचना, बाल साहित्य, अनुवाद आ भाषाविज्ञानक क्षेत्र मे निरंतर सक्रिय रहलाह।
मैथिली साहित्यक संग-संग नेपाली साहित्य पर सेहो हुनक गहिंर प्रभाव छल। हुनक रचना नेपालीक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका मे प्रकाशित होइत रहल। जनकपुर आ मिथिलाक सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन, बदलैत समय, भाषा आ समाजक अन्तर्सम्बन्ध हुनक लेखनक महत्वपूर्ण विषय रहल। एहि कारणें ओ नेपाली आ मैथिली साहित्यक बीच एकटा महत्वपूर्ण सेतुक रूप मे सेहो देखल गेलाह।
‘ई हमरे कथा थिक’, ‘इतिहासक घाओ’, ‘घरमुहा’ सहित हुनक अनेक रचना मैथिली साहित्यक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानल जाइत अछि। हुनक घर जनकपुरक साहित्यिक गतिविधिक केन्द्रक रूप मे सेहो चर्चित रहल, जतय नव पीढ़ीक लेखक-साहित्यकार हुनक संपर्क मे अबैत रहलाह।
डॉ. राजेंद्र विमलक निधन सं नेपालक मैथिली साहित्य अपन एकटा अनुभवी मार्गदर्शक, सर्जक आ अभिभावक कें गुमौने अछि। हुनक निधन केवल एकटा साहित्यकारक विदाई नहि, बल्कि मैथिली आ नेपाली साहित्यक साझा सांस्कृतिक संसारक लेल सेहो अपूरणीय क्षति अछि।