- भारत-नेपालक श्रद्धालुक अटूट आस्थाक अछि केंद्र
राजविराज, समदिया
मिथिलाक अधिष्ठात्री मां कमलाक आराधना लेल नेपालक सप्तरी जिलाक सखरा स्थित प्रसिद्ध छिन्नमस्ता भगवती मंदिर श्रद्धालुक प्रमुख आस्थाक केंद्र अछि। मधुबनी जिलाक नेउर बॉर्डर सं करीब 2 किलोमीटर दूर नेपाल मे अवस्थित एहि पवित्र शक्तिपीठक संग मिथिलाक धार्मिक आ सांस्कृतिक परंपरा जुड़ल अछि। नेपाल आ भारतक हजारो श्रद्धालु वर्ष भरि एहि ठाम दर्शन-पूजन लेल अबैत छथि। विशेष कए नवरात्रि आ कार्तिक पूर्णिमाक अवसर पर मंदिर मे भक्तिक विशेष उल्लास देखबा लेल भेटैत अछि।
एहि मंदिरक इतिहास 13म शताब्दीक कर्नाट राजवंश सं जुड़ल अछि। मानल जाइत अछि जे कर्नाट राजवंशक पांचम शासक शक्ति सिंह देव द्वारा एहि शक्तिपीठक स्थापना भेल अछि। कालांतर मे ई स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक आ आध्यात्मिक दृष्टि सं अपार महत्व प्राप्त कयलक।
देवीक नाम छिन्नमस्ता सेहो अछि। कारण ई अछि जे जहन मूर्तिक खोज भेल, तखन ओकर मस्तक अलग छल। बाद मे श्रद्धालुक द्वारा मुखौटा लगा देल गेल आ ओहि रूप मे देवीक पूजा प्रारंभ भेल। छिन्नमस्ता स्वरूप स्व-त्याग आ आत्मबलिदानक प्रतीक मानल जाइत अछि। देवी अपन शीष त्याग कए समस्त सृष्टिक हितार्थ बलिदान देलनि, एहि कारणें भक्त ओकरा परम करुणामयी आ शक्तिशाली रूप मे पूजैत अछि।
मां कमला मिथिलाक अधिष्ठात्री देवी मानल जाइत छथि। लोकमान्यता अछि जे एहि मंदिर मे शुद्ध मोन सं मां सं प्रार्थना कएनिहारक सबहक मनोकामना पूर्ण होइत अछि। चाहे ओ परीक्षा मे सफलता हो, विवाह संबंधी इच्छा, संतान सुख अथवा स्वास्थ्य-संबंधी संकट – मांक कृपा सं सभ कठिनाइ दूर भए जाइत अछि।
छिन्नमस्ता भगवती मंदिरक वातावरण पवित्रता आ शांति सं भरल अछि। भक्त लोकनिक विश्वास अछि जे एहि स्थल मे एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा विद्यमान अछि जे बारंबार दर्शन लेल आकर्षित करैत अछि। एहि मंदिरक विशेषता ई सेहो अछि जे ई सर्वजन लेल खुजल अछि। जाति, वर्ग आ पंथक भेदभावक बिना सभ लोक एहि स्थल पर समान श्रद्धा सं मांक पूजा-आराधना करैत अछि।
नवरात्रि आ कार्तिक पूर्णिमाक अवसर पर ई स्थल धार्मिक उल्लास आ श्रद्धाक अपार सागर मे बदलि जाइत अछि। दूर-दूर सं नेपाल आ भारतक हजारो भक्त एहि समय मे दर्शन लेल अबैत छथि। मेला, भजन-कीर्तन आ अनुष्ठानक आयोजन एहि पर्वक विशेष आकर्षण बनैत अछि।
छिन्नमस्ता भगवती मंदिर केवल पूजा-अर्चनाक स्थान नहि, बल्कि मिथिलाक सांस्कृतिक आ धार्मिक पहिचानक प्रतीक सेहो अछि। मां कमलाक प्रति लोकक अटूट विश्वास आ श्रद्धा एहि शक्तिपीठ कें आइयो जीवंत बनौने अछि। मिथिलाक धरती पर स्थित ई मंदिर आस्था, शक्ति आ आत्मसमर्पणक अद्भुत संगम अछि, जे भक्तक जीवन मे आशा आ साहसक दीप प्रज्वलित करैत अछि।