भारत सरकारक राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान परिषदक रिपोर्ट : शराबबंदी सं नहि थमल महिलाक विरुद्ध हिंसा, मादक पदार्थक सेवन सेहो बढ़ल
- रिपोर्ट मे प्रतिबंध हटेबाक देल गेल अछि सलाह
पटना, समदिया
राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) केर एकटा अध्ययनक अनुसार, बिहार मे शराबबंदी खत्म कए देबाक चाही, कारण एहि नीति सं महिलाक विरुद्ध हिंसा रोकबा मे अपेक्षित सफलता नहि भेटल अछि। अध्ययन मे ईहो संकेत भेटल अछि जे वैध शराबक स्थान पर मादक पदार्थ आ अवैध शराबक सेवन बढ़ल अछि।
बिहारक विकासक उपलब्धिक व्यापक परिप्रेक्ष्य, अधूरा एजेंडा आ आगांक बाट शीर्षक एहि शोध-पत्र मे कहल गेल अछि जे शराब पर उत्पाद शुल्क फेर लागू कएला सं राज्यक अपन राजस्व मे 14 सं 15 प्रतिशत धरि वृद्धि भए सकैत अछि। संगहि, शराबक तस्करी रोकबाक आ प्रवर्तन अभियान पर होयबला खर्च मे सेहो कमी आबि सकैत अछि।
इंडिया पॉलिसी फोरम मे प्रस्तुत एहि शोध-पत्रक अनुसार, अप्रैल 2016 मे शराबबंदी लागू करबाक मुख्य उद्देश्य ई मान्यता छल जे शराब घरेलू हिंसाक प्रमुख कारण मे सं एक अछि आ शराबबंदी सं परिवारक संसाधनक नीक उपयोग भए सकत। महिलाक समूह सभ सेहो एहि निर्णयक समर्थन केने छल। मुदा पर्याप्त आंकड़ाक मूल्यांकन सं पता चलैत अछि जे बिहार मे महिलाक विरुद्ध दर्ज अपराधक मामिला मे कमी नहि आएल। उनटे शराबबंदीक बादक अवधि मे एहन मामिला मे वृद्धि देखल गेल अछि।
विकासक लेल छह प्राथमिकता क्षेत्र चिन्हित
अध्ययन-पत्र मे बिहारक विकास लेल छहटा प्राथमिकता क्षेत्र चिन्हित कएल गेल अछि। एहि मे शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन आ कानून-व्यवस्था, बाढ़ि नियंत्रण, निजी क्षेत्रक विकास आ महिला सशक्तीकरण शामिल अछि। शोध-पत्र मे राज्यक सार्वजनिक ऋणक स्थिति सेहो परखल गेल अछि। संगहि, मजबूत राजस्व संग्रह आ खर्चक नीक प्रबंधनक माध्यम सं विकास योजना कें आर्थिक रूप सं सुदृढ़ करबाक उपाय सुझाओल गेल अछि।
शराबबंदी सं राजस्व कें पैघ नोकसान
शराबबंदी लागू होयबाक पहिने उत्पाद शुल्क राज्यक राजस्वक करीब 14 प्रतिशत हिस्सा छल। मुदा शराबबंदी लागू भेलाक बाद शराबक तस्करी रोकबाक, निगरानी करबाक आ कानून लागू करबाक लेल अतिरिक्त खर्च बढ़ि गेल। एहि कारण राज्यक वित्तीय स्थिति पर दोहरा दबाव पड़ल अछि। अर्थशास्त्री सभक दलक मानब अछि जे आब पहिनेक स्तर पर उत्पाद शुल्क फेर लागू करबाक उचित समय अछि। 1956 मे स्थापित एनसीएईआर भारतक पुरान आर्थिक नीति अनुसंधान संस्थान मे सं एकटा अछि। वर्तमान मे एकर शासी निकायक अध्यक्ष नंदन एम. नीलकेणि छथि।
विकसित भारत मे बिहारक भूमिका महत्वपूर्ण
बिहार देशक कुल आबादीक नौ प्रतिशत सं बेसी लोकक घर अछि। अनुमान अछि जे 2026 मे राज्यक जनसंख्या करीब 13.2 करोड़ धरि पहुंचि सकैत अछि। अध्ययन मे कहल गेल अछि जे 2005क बाद बिहार मे भेल सुधार सभ मे कानून-व्यवस्थाक पुनर्स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण रहल अछि। वर्ष 2047 धरि विकसित भारतक लक्ष्य प्राप्त करबा मे बिहारक भूमिका महत्वपूर्ण होयत। बिहार देशक दोसर सभ सं बेसी जनसंख्या बला राज्य होयबाक संगहि देशक गरीब राज्य सभ मे सेहो शामिल अछि। एहि कारण राज्य मे शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन-व्यवस्था, निजी क्षेत्रक विस्तार आ महिला सशक्तीकरण सन क्षेत्र पर विशेष ध्यान देबाक आवश्यकता अछि।