4 सितंबर कें मनाओल जायत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
- रोहिणी नक्षत्र मे व्रत आ पूजाक विशेष महत्व
सहरसा, समदिया
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कें लए कए श्रद्धालु सभ मे उत्साह अछि। पंडित तरुण झा कहलनि जे एहि बरख श्रीकृष्ण जन्माष्टमीक व्रत आ भगवान श्रीकृष्णक पूजा 4 सितंबर, शुक्रदिन कें कएल जायत। मिथिला मे विश्वविद्यालय पंचांगक अनुसार उदयव्यापिनी रोहिणी नक्षत्रयुक्त अष्टमी तिथि मे 4 सितंबर कें श्रीकृष्णाष्टमी व्रत, जन्मोत्सव, गोकुलाष्टमी, मोहरात्रि आ शक्ति पूजन करब सर्वोत्तम मानल गेल अछि। पंडित तरुण झा कहलनि जे जन्माष्टमीक अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण कें दही, माखन, मिश्री, तुलसी दल आ मोदकक भोग लगबाक चाही। मध्यरात्रि मे भगवानक जन्मोत्सवक समय पंचामृतक भोग अवश्य अर्पित करबाक चाही। ओ कहलनि जे पंचामृत मे दूध, दही, घी, गंगाजल आ मधुक प्रयोग कएल जाइत अछि। ओ कहलनि जे जन्माष्टमीक दिन संभव हो तं श्रीमद्भागवत गीताक पाठ करबाक चाही। धार्मिक मान्यताक अनुसार एहि सं मनोवांछित फल प्राप्त होइत अछि। जे लोक गीताक पाठ करऽ मे असमर्थ छथि, ओ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्रक यथासंभव जाप कए सकैत छथि। धार्मिक मान्यताक अनुसार एहि मंत्रक जाप सं जीवनक विभिन्न कष्ट दूर होइत अछि। पंडित झा कहलनि जे श्रीकृष्ण जन्माष्टमीक व्रत श्रद्धा आ भक्तिक संग करला सं भगवान श्रीकृष्णक कृपा प्राप्त होइत अछि। एकर अतिरिक्त संतान प्राप्तिक कामना रखनिहार दंपती सभ लेल सेहो जन्माष्टमीक व्रत फलदायी मानल गेल अछि। ओ श्रद्धालु सभ सं विधि विधान आ श्रद्धाक संग भगवान श्रीकृष्णक पूजा-अर्चना करबाक अपील कएलनि।
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