जमुई घटना: मोरल पुलिसिंग नहि, ई गुंडागर्दी अछि
सच्चिदानंद सच्चू
सभ्य समाजक पहिल पहिचान की अछि? कानूनक सम्मान, दोसरक स्वतंत्रताक आदर आ कमजोरक सुरक्षा। मुदा जखन समाज मे किछु लोक स्वयं के कानून सं ऊपर बुझए लगैत अछि, तखन ओहि समाजक सभ्यताक बुनियाद पर प्रश्नचिह्न ठाढ़ भए जाइत अछि। जमुई मे दू नाबालिग छात्र-छात्राक संग जे घटना भेल, से एहि प्रश्न कें फेर सं हमरा सभक सामने ठाढ़ कए देने अछि।
पुलिसक अनुसार 19 सितंबरक सांझ कोचिंग सं लौटि रहल दसम कक्षाक दू नाबालिग छात्र-छात्रा कें किछु युवक रोकलक, हुनका सभक संग दुर्व्यवहार आ माइरपीट केलक तथा छात्राक संग यौन दुर्व्यवहार सेहो भेल। घटनाक वीडियो बनाओल गेल आ बाद मे सोशल मीडिया पर वायरल कए देल गेल। पुलिस करीब सात आरोपितक पहिचान करबाक बात कहलक अछि, जाहि मे तीन लोकक गिरफ्तारी भए चुकल अछि। एहि घटनाक जांच लेल एसआइटी सेहो गठित भेल अछि।
एहि घटना पर सभ सं पैघ चिंता मात्र ई नहि अछि जे किछु युवक कानून अपन हाथ मे लए लेलनि। चिंता एहि मानसिकताक अछि जे किछु लोक कें ई अधिकार के देलक जे ओ तय करत जे कोन युवक कोन युवतीक संग चलत? ककरा सं बात करत? कतय जायत? कोन कपड़ा पहिरत? आ अपन निजी जीवन कोना जीयत?
एहि तरहक व्यवहार कें बेसी काल मोरल पुलिसिंग कहि कए प्रस्तुत कएल जाइत अछि। मुदा नैतिकता ककरा कहल जायत आ ओकर ठेकेदार के होयत? समाज मे नैतिकताक चर्चा जरूर होयबाक चाही, मुदा नैतिकताक नाम पर कानून हाथ मे लए कए कोनो व्यक्ति कें रोकब, अपमानित करब, मारब, धमकाएब अथवा ओकरा संग यौन दुर्व्यवहार करब नैतिकता नहि भए सकैत अछि। ई तं सीधा-सीधा गुंडागर्दी अछि।
सभ्य समाज मे कोनो व्यक्तिक व्यवहार पर आपत्ति हो तं कानूनक रस्ता अछि। अभिभावक अपन संतान सं बात कए सकैत छथि। शिक्षक समझा सकैत छथि। समाज मे संवाद भए सकैत अछि। मुदा सड़क पर ककरो घेरि कए पूछताछ करब, धमकायब आ शारीरिक रूप सं प्रताड़ित करबक अधिकार ककरो नहि अछि।
सब सं पैघ प्रश्न ई अछि जे आखिर ई मनबढ़ू तबका चाहैत की अछि?
की ओ चाहैत अछि जे आजुक लड़का ओकर हिसाब सं चलैक? आजुक लड़की ओकर हिसाब सं घर सं निकलैक? दुनू कोन कपड़ा पहिरत, ककरा सं मित्रता करत, कतय घुमत – एहि सभक फैसला सेहो ओ करय? जं समाज एहि दिशा मे चलि पड़त तं व्यक्तिक स्वतंत्रता, संविधानक अधिकार आ कानूनक शासनक अर्थे की रहि जायत?
युवावस्था मे दोस्ती होयब अपराध नहि अछि। कोनो लड़का आ लड़की एक-दोसराक मित्र भए सकैत अछि। कोनो युवती अपन पसंदक कपड़ा पहिरि सकैत अछि। कोनो युवक अपन पसंदक स्थान पर जा सकैत अछि। एहि सभ बात पर असहमति भए सकैत अछि, पारिवारिक अथवा सामाजिक संवाद भए सकैत अछि; मुदा असहमतिक उत्तर हिंसा नहि भए सकैत अछि।
वास्तव मे मोरल पुलिसिंगक समस्या तखने जन्म लैत अछि जखन कानूनक जगह भीड़ लेबाक प्रयास करैत अछि। जखन लोक मानि लैत अछि जे पुलिस, न्यायालय आ संविधानक जरूरत नहि – हम स्वयं तय करब जे सही की आ गलत की – तखन कानून व्यवस्था कमजोर होइत अछि आ भीड़क मनोवृत्ति मजबूत।
जमुईक घटना एहि कारण सेहो गंभीर अछि जे पीड़ित दुनू नाबालिग छथि। बच्चा सभक सुरक्षा लेल विशेष कानून अछि। मुदा घटनाक वीडियो बना कए ओकरा सोशल मीडिया पर पसारब पीड़ितक पीड़ा कें आरो बढ़ा देलक। पुलिस एहि मामिला मे करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर मामिला दर्ज कएलक अछि, कारण वीडियो मे नाबालिग पीड़िताक पहिचान उजागर होइत छल।
एहि ठाम सोशल मीडिया प्रयोगकर्ताक जिम्मेदारी सेहो कम नहि अछि। कोनो अपराधक वीडियो देखबाक उत्सुकता बुझल जा सकैत अछि, मुदा नाबालिग पीड़िताक पहिचान उजागर करैत सामग्री साझा करब संवेदनहीनता अछि आ कानूनी रूप सं सेहो गंभीर विषय अछि। पुलिस स्वयं लोक सं एहि तरहक वीडियो साझा नहि करबाक अपील कएलक अछि।
एहि पूरा प्रकरण मे एकटा अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष पीड़िताक गोपनीयता अछि। दुनू पीड़ित नाबालिग छथि। अपराधक शिकार भेल बच्चाक पहिचान सार्वजनिक करब, ओकर फोटो अथवा वीडियो साझा करब, ओकर नाम, चेहरा, स्कूल, घर अथवा परिवारक संबंध मे जानकारी पसारब – ई पीड़िताक पीड़ा कें आरो गहींर करैत अछि। अपराधी सं न्याय पाबि रहल पीड़ित कें समाजक नजरि मे फेर अपराधक विषय बना देब कोनो संवेदनशील समाजक लक्षण नहि भए सकैत अछि। सोशल मीडिया पर कोनो आपत्तिजनक वीडियो भेटला पर ओकरा सबूत अथवा खबरिक नाम पर आगू बढ़ेनाइ सेहो उचित नहि अछि। कानून अपन प्रक्रिया सं जांच करत, आम लोकक जिम्मेदारी अछि जे पीड़िताक पहिचान गोपनीय राखय आ एहन सामग्रीक प्रसार रोकय। विशेष रूप सं पत्रकार, सोशल मीडिया पेज आ डिजिटल प्लेटफॉर्म सभ कें ई बात बुझबाक जरूरत अछि जे समाचारक अधिकार सं पहिने पीड़ितक गरिमा आ गोपनीयताक अधिकार अछि। न्याय मात्र अपराधीक सजा सं नहि, बल्कि पीड़ित कें सम्मानपूर्वक अपन जीवन मे लौटबाक सुरक्षित वातावरण देला सं सेहो सुनिश्चित होइत अछि।
एहि घटनाक बहन्ने समाज कें एकटा मूल प्रश्न पर सोचबाक आवश्यकता अछि – हम अपन बच्चा सभ लेल कोन समाज छोड़ि रहल छी? एहन समाज जतय हुनका अपन जीवनक फैसला कानून आ परिवारक सुरक्षित संवादक भीतर करबाक स्वतंत्रता रहत, अथवा एहन समाज जतय सड़क पर किछु मनबढ़ू लोक तय करत जे हुनका कोना जीबाक अछि?
सभ्य समाज मे नैतिकता जरूरी अछि, मुदा नैतिकताक पहरा बंदूक, लाठी, गारि आ भीड़क हाथ मे नहि भए सकैत अछि। नैतिकता संवाद सं आबैत अछि, शिक्षा सं आबैत अछि, संवेदना सं आबैत अछि। कानून तोड़ि कए नैतिकता स्थापित नहि कएल जा सकैत अछि।
जमुईक घटना पर कठोर कानूनी कारबाइ जरूरी अछि। संगहि समाजक भीतर पसरि रहल एहि मानसिकताक विरोध सेहो जरूरी अछि। कारण अपराधी बदलि सकैत अछि, घटना बदलि सकैत अछि, स्थान बदलि सकैत अछि – मुदा जं हम तय करब जे दोसर कोना जीबय, जं ई मानसिकता जीवित रहल, तं एहन घटना फेर-फेर सामने अबैत रहत।
मोरल पुलिसिंगक नाम पर ककरो अपमानित करबाक, हिंसा करबाक अथवा कानून अपन हाथ मे लेबाक अधिकार ककरो नहि अछि। नैतिकताक नाम पर जे कानून तोड़ैत अछि, ओ नैतिक प्रहरी नहि – कानूनक नजरि मे अपराधी अछि।