जलविद्युत् क्षेत्र कें एखन धरि सभ सं पैघ क्षति, 900 मेगावाट धरि विद्युत् उत्पादन प्रभावित
नेपाल बाढ़ि : लगभग एक दर्जन जलविद्युत केंद्र एहि आपदा मे भेल ठप
फोटो : 11, 12, 13
काठमांडू, एजेंसी
26 अगस्त कें पैघ-पैघ चट्टान, गाद-माटि आ पाथरक टुकड़ाक संग भोटेकोशी नदीक बाढ़ि आएल। तकर नीचां त्रिशूली नदी सेहो उफनाएल, जाहि सं एहि क्षेत्र मे भारी जन-धनक क्षति भेल। त्रिशूली कॉरिडोर कहल जाएबला एहि क्षेत्र मे नदीक धाराक क्रम मे एक-दोसराक बाद बनल आ बनि रहल करीब एक दर्जन जलविद्युत् केंद्र अछि। बाढ़ि आ पहाड़ सं खसल माटि-पाथरक तेज बहाव सं एहि मे कतेको विद्युत् केंद्र पूर्ण रूप सं ध्वस्त भए गेल अछि।
एहि विद्युत् केंद्रक लगपास काज करयबला उच्च दक्षताक तकनीशीयन सहित सैकड़ो लोक एखनहुं निपत्ता छथि। जलविद्युत् विकासक काज मे प्रारंभहि सं जुड़ल नेपालक पूर्वमंत्री आ नेपाल विद्युत् प्राधिकरणक पूर्वकार्यकारी निर्देशक कुलमान घिसिंग एहि क्षति कें नेपालक जलविद्युत् विकासक इतिहासक सभ सं पैघ क्षति मानैत छथि। हुनकर कहब अछि जे ध्वस्त भेल संरचनाक पुनर्निर्माण मे कम-सं-कम कतेको वर्ष लागि सकैत अछि।
कतय कतेक क्षति भेल?
30 अगस्त कें त्रिशूली कॉरिडोरक स्थलगत निरीक्षण कए लौटल घिसिंग विभिन्न जलविद्युत् संरचना मे भेल क्षतिक जानकारी देलनि। ओ कहलनि जे रसुवागढी, चिलिमे, लाङ्टाङ खोला आ त्रिशूली-3ए जेकां जलविद्युत् पावरहाउस आ हेडवर्क्स दुनू नष्ट भए गेल अछि। करीब 250 मेगावाट क्षमताक जलविद्युत् आयोजना पूर्ण रूप सं ध्वस्त भए गेल अछि। एकर अतिरिक्त करीब 230 सं 235 मेगावाट क्षमताक पावरप्लांटक प्रसारण लाइन आ सबस्टेशन नष्ट भेलाक कारण बंद अछि।
घिसिंगक अनुसार करीब 450 मेगावाट क्षमताक उत्पादन एखन बंद अछि। एहि मे करीब 250 मेगावाटक परियोजना पूर्ण रूप सं ध्वस्त भेलाक कारण कतेको वर्ष धरि फेर संचालन मे आबि नहि सकत। निर्माणाधीन कतेको परिोजना मे सेहो भारी क्षति भेल अछि। सरसरी निरीक्षणक आधार पर करीब 500 मेगावाट क्षमताक निर्माणाधीन परिोजना मे असरि पड़ल अछि। संचालन मे रहल करीब 430 मेगावाट क्षमताक परियोजना बंद अछि, जाहि मे करीब 250 मेगावाटक परियोजना पूर्ण रूप सं नष्ट भए गेल अछि। एहि हिसाब सं त्रिशूली कॉरिडोरक करीब 900 मेगावाट क्षमताक परियोजना मे क्षति पहुंचल अछि।
बाढ़ि मे कतेको पहुंच मार्ग सेहो बहि गेल अछि। पूरा क्षेत्र उजड़ि गेल। टिमुरे आ रसुवागढी सं लए कए बेत्रावती, विदुर आ तकर नीचां देवीघाट धरि क्षति भेल अछि।
संचालन मे रहल जलविद्युत् परियोजना
111 मेगावाटक रसुवागढी – पूर्ण रूप सं ध्वस्त
22 मेगावाटक चिलि मे – पूर्ण रूप सं ध्वस्त
20 मेगावाटक लांगटांग (निजी) – पूर्ण रूप सं ध्वस्त
60 मेगावाटक अपर त्रिशूली-3ए – पूर्ण रूप सं ध्वस्त
24 मेगावाटक त्रिशूली जलविद्युत् परियोजना – पूर्ण रूप सं ध्वस्त
14 मेगावाटक देवीघाट जलविद्युत् परियोजना – पूर्ण रूप सं ध्वस्त
निर्माणाधीन जलविद्युत् आयोजना
216 मेगावाटक अपर त्रिशूली-1 (कोरियाली लगानी) – भारी क्षति
37 मेगावाटक अपर त्रिशूली-3बी – भारी क्षति
120 मेगावाटक लांगटांग भोटेकोशी परियोजना – निर्माणक काज शुरू होइत छल, मुदा क्षतिग्रस्त
घिसिङक अनुसार प्रसारण लाइनक 15 सं 20 टावर सेहो बाढ़ि मे बहि गेल अछि। एहि क्षेत्रक प्रमुख विद्युत् केंद्र मानल जाएबला त्रिशूली-3बी सबस्टेशन सेहो पूर्ण रूप सं नष्ट भए गेल अछि।
स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकक संस्था इप्पानक जानकारीक अनुसार, उपर्युक्त परियोजनाक अतिरिक्त 5 मेगावाटक मैलुङखोला जलविद्युत् परियोजना, 15 मेगावाटक मध्यत्रिशूली गंगा जलविद्युत् परियोजना आ 25 मेगावाटक सौर्य विद्युत् परियोजना मे सेहो क्षति भेल अछि।
पैसा आ समय दुनू गमाओल गेल
त्रिशूली कॉरिडोर मे भेल एहि क्षति सं धनक संग-संग कतेको वर्षक समय सेहो नष्ट भेल अछि। जानकार सभक अनुसार क्षतिक वास्तविक आकलन करय लेल विस्तृत अध्ययन आवश्यक अछि।
इप्पानक पूर्वअध्यक्ष गणेश कार्की कहलनि जे सामान्यतः जलविद्युत् केंद्रक निर्माण एहि हिसाब सं कएल जाइत अछि जे अनुमानित जलप्रवाह सं पांच गुना बेसी पानि अयला पर सेहो संरचना सुरक्षित रहय। मुदा एहि बेरक बाढ़ि सामान्य अनुमान सं बहुत बेसी विनाशकारी छल।
ओ कहलनि जे निजी क्षेत्रक अपर त्रिशूली-1 परियोजना सेहो क्षतिग्रस्त भेल अछि। ई परियोजना कोरियाली प्राविधिक आ अंतर्राष्ट्रिय परामर्शदाताक सहयोग सं बनि रहल छल। बाढ़ि मे बाहरी संरचना बहलाक संग भूमिगत संरचना मे सेहो पानि आ गादि भरि गेल अछि।
कार्कीक अनुसार क्षति दू प्रकारक अछि। संचालन मे रहल परियोजना बंद भेला सं संरचनाक क्षति सं आमदनीक सेहो नोकसान भेल अछि। निर्माणाधीन परियोजनाक वास्तविक क्षति कतेक अछि, से विस्तृत जांचक बादे स्पष्ट भए सकत। किछु परियोजनाक सुरंग बाद मे फेर उपयोग मे आबि सकैत अछि, जखन कि किछु परियोजनाक हेडवर्क्स मात्र गाद-माटि सं भरल होयत।
घिसिंगक अनुमान अछि जे त्रिशूली कॉरिडोर मे एक खरब नेपाली रुपैयां सं बेसीक क्षति भेल अछि। हुनकर कहब अछि जे युद्धस्तर पर पुनर्निर्माणक काज शुरू कएल जाए तं दू सं तीन वर्ष लागि सकैत अछि। नहि तं एहि मे कतेको वर्ष लागि सकैत अछि। एहि क्षेत्रक अधिकांश जलविद्युत् परियोजना पछिला दू सं अढ़ाइ दशक मे बनल अछि अथवा निर्माणाधीन अछि।
भोटेकोशी–त्रिशूली बाढ़ि सं की सीख लेबाक चाही?
एहन विनाशकारी बाढ़िक कल्पना पहिने कियो नहि केने छल। घिसिंगक कहब अछि जे आब एहि विपदा सं सीख लए कए जलविद्युत् परियोजनाक डिजाइन आ सुरक्षा व्यवस्थाक फेर सं समीक्षा करबाक आवश्यकता अछि। ओ कहलनि जे पावरहाउस कोन ठाम आ कोना बनाओल जाए, सुरक्षा व्यवस्था कोना मजबूत कएल जाए, सुरंगक पहुंच मार्ग कोना बनाओल जाए आ पावरहाउसक भीतर आपातलीन निकासक व्यवस्था कोना राखल जाए – एहि सभ विषय पर गंभीरता सं विचार करबाक चाही।
हुकर अनुसार जलविद्युत् परियोजनाक समग्र डिजाइनक समीक्षा आवश्यक अछि। एहन अप्रत्याशित बाढ़ि कें ध्यान मे राखि हेडवर्क्स सहित सभ महत्वपूर्ण संरचनाक डिजाइन आ सुरक्षा व्यवस्था मे सुधार करबाक जरूरत अछि।
घिसिंगक पावरहाउसक संचालन पूर्ण रूप सं बाहर सं करबाक व्यवस्था करबाक सुझाव देलनि। हुनकर कहब अछि जे पावरहाउसक भीतर अनावश्यक रूप सं लोक नहि रहय, एहि लेल उपलब्ध प्रविधिक उपयोग बढ़ेबाक चाही।