मधुबनी : लेखकक निवास ‘सरस्वती सदन’, सरिसो पाही मे लेखक डा. अजय मिश्रक महत्वपूर्ण कृति ‘विदेश्वर’क लोकार्पण समारोह आत्मीय एवं साहित्यिक वातावरण मे संपन्न भेल। एहि अवसर पर डा. सदन मिश्र द्वारा पुस्तकक विधिवत् लोकार्पण कएल गेल। मैथिलक स्तरीय प्रकाशन लेल ख्यात ‘अनुप्रास प्रकाशन’ द्वारा प्रकाशित एहि पोथीक लोकार्पण अवसर पर मिथिलाक ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर पर सार्थक विमर्श कएल भेल।
‘विदेश्वर’ मात्र एकटा धार्मिक स्थलपर केंद्रित पोथी नहि, बल्कि मिथिलाक सांस्कृतिक चेतना, लोकविश्वास, इतिहास आ शिवभक्तिक परंपरा कें समेटनिहार महत्वपूर्ण कृति अछि। विदेश्वर मंदिरक मुख्य पंडा पंडित लाल झा अपन वक्तव मे कहलनि. पोथी मे विदेश्वर/विरेश्वरक प्राचीन स्वरूप, नाम-परंपरा, लोकविश्वास, ऐतिहासिक संदर्भ एवं धार्मिक महत्त्वक विस्तार सं चर्चा कैल गेल अछि। पोथी मे विदेश्वर क्षेत्रक भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिवेशक संग-संग मंदिर, पूजा-परंपरा आ स्थानीय जनजीवन सं जुड़ल कतेको पक्ष कें सेहो प्रस्तुत कएल गेल अछि।
डा. अजीत मिश्र कहलनि पोथीक एक उल्लेखनीय पक्ष एकर लोक आ शास्त्रक समन्वय अछि। लेखक ऐतिहासिक तथ्यक संग लोकस्मृति, लोककथा, भक्तिक अनुभव आ परंपरागत आस्था सभ कें सेहो महत्व देने छथि। विदेश्वरक प्रति मिथिलावासी सभक श्रद्धा, शिवोपासना, पार्थिव शिवलिंगक निर्माण एवं पूजाक परंपरा तथा स्थानीय भक्तजनक जीवन सं जुड़ल प्रसंग पोथी कें आत्मीय आ जीवंत बनबैत अछि। पोथी मे विदेश्वरक भक्ति सं जुड़ल स्थानीय व्यक्तित्व आ भक्तक प्रसंग सेहो विशेष रूप सं आएल अछि।
लेखक डा. अजय मिश्रक लेल विदेश्वर मात्र अध्ययनक विषय नहि, बल्कि आत्मीय अनुभूति आ दीर्घकालीन जिज्ञासाक विषय रहल अछि। विदेश्वर सं जुड़ल अपन अनुभव, संस्मरण तथा ‘विरेश्वर शतक’सं प्राप्त प्रेरणाक क्रमशः विकसित रूप मे एहि कृतिक रचना भेल अछि। एहि कारणें पोथी मे शोधपरक दृष्टिक संग व्यक्तिगत संवेदना आ सांस्कृतिक अनुरागक सुंदर समन्वय देखबा मे अबैत अछि।
कार्यक्रम मे डा. भवेश्वर सिंह, नीरजा सिंह, डा. अजीत मिश्र, विवेक मिश्र, पंडित लाल झा, डा. रुचिका, अनिल मिश्र, रविजी, दीप नारायण विद्यार्थी, अमित कुमार, अंजलिका आ उदय मिश्र सहित कतेको विद्वान, साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य व्यक्तिक गरिमामय उपस्थिति छल।
कार्यक्रमक संचालन साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार प्राप्त कवि एवं लेखक दीप नारायण विद्यार्थी द्वारा कएल गेल। लोकार्पण अवसर पर उपस्थित विद्वान लोक ‘विदेश्वर’कें मिथिलाक धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरक दस्तावेजीकरणक दृष्टिएं महत्वपूर्ण प्रयास बतौलनि। एहि कृतिक माध्यम सं विदेश्वरक इतिहास, आस्था आ सांस्कृतिक महत्त्व कें नव पीढ़ी धरि पहुंचयबाक दिशा मे सेहो सार्थक पहल होएबाक बात कहल गेल।
कार्यक्रमक अंत मे लेखक डा. अजय मिश्र उपस्थित अतिथि, विद्वान, साहित्यप्रेमी एवं सहयोगी सभक प्रति धन्यवाद ज्ञापित केलनि। लोकार्पण समारोह साहित्यिक आत्मीयता, सांस्कृतिक चेतना आ मिथिलाक विरासत कें संरक्षित करबाक संकल्पक वातावरण मे संपन्न भेल।